सिरसा। एससीईआरटी (राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) के आदेशों की अनुपालना में बुधवार को डाइट डिंग में नियमित एवं अतिथि पीजीटी गणित के द्वितीय बैच के पांच दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण में गणित शिक्षण को रोचक, व्यावहारिक और तकनीक आधारित बनाने के साथ डिजिटल संसाधनों, स्मार्ट श्वेतपट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों के प्रभावी उपयोग पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम जिला शिक्षा अधिकारी एवं डाइट डिंग के प्राचार्य सुभाष फुटेला के निर्देशन तथा डाइट प्रभारी सुरेंद्र सिंह नूनिया, आईएफआईसी विंग प्रभारी नरेश नरूला और प्रशिक्षण कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनिल चावला की देखरेख में आयोजित हो रहा है। डाइट प्रवक्ता डॉ. विनोद भट्टू ने बताया कि प्रशिक्षण की शुरुआत नरेश नरूला और डॉ. अनिल चावला ने प्रतिभागियों के स्वागत एवं पूर्व-परीक्षण के साथ की।
इसके माध्यम से शिक्षकों के पूर्व ज्ञान और विषयगत समझ का आकलन किया गया। डाइट विषय विशेषज्ञ चंद्र प्रकाश शर्मा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम सह-समन्वयक डॉ. अनिल बिश्नोई ने प्रशिक्षण की रूपरेखा बताई।
प्रात:कालीन सत्र में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मम्मड़ खेड़ा के प्राचार्य नीरज पाहुजा ने ‘मनोरंजक गणित’ विषय पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने गणितीय पहेलियों, खेलों और गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने तथा गणित के भय को कम करने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां तार्किक एवं रचनात्मक सोच विकसित करने में सहायक हैं।
इसके बाद एससीईआरटी हरियाणा से प्रशिक्षित पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बणी के गणित प्रवक्ता रोहित सिंघल ने ‘वास्तविक जीवन में गणितीय प्रतिरूपण’ विषय पर दैनिक जीवन की परिस्थितियों को गणितीय अवधारणाओं से जोड़ने के तरीके समझाए।
जिला गणित विशेषज्ञ सिरसा डॉ. प्रिय दर्शन बेनीवाल ने ‘गणित शिक्षा में डिजिटल शिक्षण विधियों, स्मार्ट श्वेतपट एवं आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों का एकीकरण’ विषय पर प्रशिक्षण दिया। प्रथम दिन शिक्षकों ने गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए आधुनिक शिक्षण विधियों और तकनीकी संसाधनों का व्यावहारिक अभ्यास किया। प्रतिभागियों की पंजीकरण प्रक्रिया डाइट क्लर्क सुनील कुमार ने पूरी करवाई।
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प्रशिक्षण का उद्देश्य पीजीटी गणित शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण विधियों और तकनीकी संसाधनों से परिचित करवाने के साथ उनके व्यावहारिक उपयोग में दक्ष बनाना है ताकि वह विद्यार्थियों को गणित विषय अधिक प्रभावी एवं रुचिकर ढंग से पढ़ा सकें।- डॉ. अनिल बिश्नोई, सह-समन्वयक, पीजीटी गणित प्रशिक्षण कार्यक्रम, डाइट डिंग, सिरसा