सिरसा। बिजली निजीकरण के विरोध सहित कई मुद्दों पर इलेक्ट्रिसिटी फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर 30 जनवरी को देशभर के बिजली कर्मचारी लाखों की संख्या में संसद की ओर कूच करेंगे। यह बात सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा से संबंध ऑल हरियाणा पावर कार्पोरेशन वर्कर यूनियन के राज्य उपप्रधान बाबूलाल व केंद्रीय परिषद सदस्य राजेश भाकर ने मीडिया से बातचीत में कही।
उन्होंने कि केंद्र व राज्य सरकारें सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि निजीकरण से न केवल कर्मचारियों का भविष्य संकट में पड़ेगा बल्कि देश व प्रदेश की आम जनता भी सीधे प्रभावित होगी। नेताओं ने बताया कि केंद्र सरकार ने विरोध के बावजूद बिहार चुनाव के तुरंत बाद 29 श्रम कानून समाप्त कर चार लेबर कोड लागू कर दिए, जो मजदूरों, कर्मचारियों तथा आम जनता के हितों के प्रतिकूल हैं।
इसी के चलते पूरे प्रदेश में बिजली कर्मचारी लगातार आंदोलनरत हैं और 21 सूत्रीय मांगपत्र अतिरिक्त मुख्य सचिव (विद्युत) को सौंपा जा चुका है। यदि सरकार ठोस पहल नहीं करती तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। सर्कल सचिव मदनलाल कंबोज, सुखदेव सिंह, सुभाष ढाल, रामकिशन, अविनाश कंबोज व सुरजीत सिंह बेदी ने बताया कि यह आंदोलन प्रदेश भर में सब युनिट से लेकर प्रदेश स्तर तक लगातार जारी है केंद्र सरकार द्वारा लाया गया बिजली बिल संशोधन 2025 बिजली ढांचे के निजीकरण का रास्ता खोलता है, इसलिए आगामी आंदोलन को और बड़े स्तर पर बढ़ाया जाएगा