सिरसा। फर्जी फर्मों के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई से आरोपियों में हड़कंप मचा हुआ है। ईडी ने आरोपी महेश बंसल,पदम बंसल व उनके परिवार के सदस्यों की करीब 17.16 करोड़ रुपये की 37 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने का आदेश जारी किया है। सूत्रों के अनुसार आरोपियों ने ज्यादातर संपत्ति अपने नाम से नहीं खरीदी। ये संपत्तियां उनके दूर के रिश्तेदारों के नाम पर हैं।
इनमें से कई बेची जा चुकी हैं, जिनकी कीमत 100 करोड़ से भी ज्यादा है। वहीं, ईडी की टीम आरोपियों की संपत्तियों पर आदेश की कॉपी चस्पा करने जल्द सिरसा आ आएगी। आरोपियों पर वर्ष 2015 से 2020 तक सिरसा पुलिस की ओर से 30 एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोपियों पर न्यायालय में केस चल रहा है,लेकिन पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई पर रोक लगा दी है।
आरोपियों ने तमाम एफआईआर रद्द करने की मांग हाईकोर्ट से की हुई है। आरोपियों के अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया है कि कथित अपराध हरियाणा वैट अधिनियम 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत आता है। उक्त अधिनियम एक विशेष अधिनियम होने के कारण आईपीसी के सामान्य प्रावधानों पर प्रबल है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई कहा है कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट, 2005 के तहत कथित गलत इनपुट क्रेडिट बेनिफिट के कारण एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। इसलिए हाईकोर्ट ने आगामी आदेश तक केसों की सुनवाई पर रोक लगा दी है। इस मामले की सुनवाई 29 जनवरी 2026 को होगी।
सरकार को हुआ 43.65 करोड़ रुपये का नुकसान
ईडी के मुताबिक, इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत जांच जारी है। इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों और पैसों की जांच की जाएगी। यह घोटाला आबकारी एवं कराधान विभाग से संबंधित है। जांच में सामने आया कि कुछ फर्मों ने फर्जी सी-फॉर्म के जरिए गलत तरीके से वैट रिफंड लिया। आरोपियों ने सरकार को कुल 43.65 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है।