ऊंट पर बैठकर सम्मान स्थल तक जाते उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला
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उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अपने पैतृक गांव चौटाला में पहुंच कर उसे प्रणाम किया। गांव में पहुंचने पर वे ऊंट पर सवार होकर सम्मान स्थल पर पहुंचे। इस मौके पर दुष्यंत चौटाला ने कहा कि मैं सबसे कम उम्र का विधायक हूं। साथ ही गर्व है कि आपने इस गांव से चार और विधायक विधानसभा में भेजने का काम किया। गांव में 15, 16 हजार वोट हैं। कई साथी आकर कहते हैं कि हमें 1200 वोट मिले। लेकिन सचिवालय की पांचवीं मंजिल आपकी है। कोई भी आकर काम करवा सकता है।
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि हमारा गांव मॉडर्न है लेकिन कुछ चीजे जैसे कि सीवरेज व्यवस्था नहीं है। यदि पूरा गांव सहमत हो तो प्रस्ताव पास करके सीवरेज लाइन डाल दी जाएगी। गांव में बसे बाहर ही होकर चली जाती है। गांव के बाहर कोई पंचायती भूमि नहीं है, यह मैनें राजस्व विभाग का रिकार्ड चेक करवाया है। गांव आपसी सहमति कर लें और बस स्टैंड को सुधारने का काम किया जा सकता है।
गांव के छोटे स्टेडियम को देखकर मुझे बात याद आ गई कि कभी इसमें वालीवाल का टूर्नामेंट हुआ करते थे। एक दिन घर में बड़े चौधरी साहब की फोटो मिली। जिसे देखकर याद आया कि कभी गांव में देश भर की टीमें बालीबाल खेलने आती थी। बड़े स्टेडियम को सुधारने की जरूरत है, प्रस्ताव भिजवाएं। वालीबाल की नेशनल एकेडमी खोलने के लिए खेल विभाग से बात करूंगा। लेकिन मेरी इच्छा है कि खेल स्टेडियम का नाम मेरी दादी के नाम पर रखा जाए।
इस गांव की दो चीजें इसकी ताकत है। एक देवीलाल और दूसरा चौटाला। इस गांव में सभी जातियों के लोग रहते हैं। लेकिन एक बात विशेष है कि सभी अपने नाम के पिछले जाति लिखने की बजाए चौटाला लिखते हैं। देवीलाल एक और जिम्मेदारी छोड़कर गए हैं जिसे आगे ले जाने का काम सबको पूरा करना पड़ेगा।