सांड को गोशाला में छोड़ने के लिए गाड़ी में चढ़ाते हुए।
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सब्जी के छिलकों के साथ करीब चार तोले सोने के जेवरात निगलने वाले लावारिस सांड़ के गोबर से आखिरकार करीब 20 दिन बाद भी सोने के आभूषण नहीं निकले। ऐसे में बीते दिन वीरवार को परिवार ने उसे नंद बाबा गोशाला अस्पताल के सुपुर्द कर दिया गया।
गोशाला के सदस्य बड़ी मुश्किल से सांड़ को गाड़ी के पीछे बांधकर ले गए। जनक राज ने बताया कि उनके परिवार ने 20 दिन तक सांड़ की खूब सेवा की, लेकिन बावजूद इसके जेवरात बाहर नहीं निकले। इस कारण वीरवार को उन्होंने सांड़ को नंद बाबा गोशाला को सपुर्द करने का निर्णय, इसके बाद गोशाला के सदस्य सांड़ को पकड़ने पहुंचे और मुश्किल से उसे काबू किया। उन्होंने बताया कि पशु चिकित्सकों की ओर से एक अन्य विकल्प ऑपरेशन बताया जा रहा था, लेकिन उस ऑपरेशन से सांड़ की जान को खतरा था। पीड़ित परिवार दूसरे विकल्प का सहारा नहीं लेगा।
यह था मामला
जानकारी अनुसार वार्ड नंबर छह की खेत्रपाल मंदिर वाली गली के निवासी जनक राज की पत्नी ने 19 अक्तूबर को सोने के जेवर साफ करके रसोई में रख दिए थे। उसके बाद परिवार के किसी सदस्य ने उन जेवरातों पर सब्जी के छिलके रख दिए थे। इसके बाद जेवरात छिलकों के साथ बाहर गली में फेंक दिए थे। इस दौरान एक लावारिस सांड़ आया और उसने छिलकों के साथ जेवरों को भी निगल लिया। घर में काफी देर तलाश करने के बाद भी जेवर न मिलने पर जब सीसीटीवी की जांच की तो तब इस बात का पता चला कि जेवरात सांड़ ने छिलकों के साथ निगल लिए। इसके बाद उसके परिजनों ने गली वासियों की मदद से उस सांड़ की तलाश की और उसे पकड़कर खाली प्लॉट में बांध दिया था। परिजनों की ओर से लावारिस सांड़ को हरा चारा व अन्य खाद्य सामग्री खिलाई, ताकि गोबर के माध्यम से बाहर आ जाए। परिवार ने करीब 20 दिन तक सांड़ की खातिरदारी की, लेकिन जेवरात बाहर नहीं निकले।