संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। सरकार की ओर से महिलाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने और खेती को आधुनिक स्वरूप देने के उद्देश्य से शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना का जिले में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई इस योजना की जमीनी हकीकत ठीक नहीं है। स्थिति यह है कि ड्रोन दीदी अपने निर्धारित लक्ष्य का 20 प्रतिशत भी पूरा नहीं कर पाई हैं। गेहूं का आधा सीजन गुजर चुका है और बड़े स्तर पर किसान अपने खेतों में यूरिया डाल चुके हैं।
अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत प्रत्येक ड्रोन दीदी को एक हजार एकड़ कृषि भूमि पर किसानों के खेतों में ड्रोन से नैनो यूरिया का छिड़काव करना था। इसके लिए किसानों का पंजीकरण किया जाना था। प्रति एकड़ 150 रुपये की दर से ड्रोन सेवा उपलब्ध करानी थी। नैनो यूरिया में किसानों के रुचि नहीं दिखाने के परिणामस्वरूप पायलट प्रोजेक्ट लगभग ठप हो गया।
प्रोजेक्ट का आधार : जिले में इस समय आठ ड्रोन दीदी पंजीकृत हैं। इनको कृभकों से ड्रोन दिए गए हैं। इसका लक्ष्य उनकी आय बढ़ाना था। साथ ही कृषि विभाग की योजनाओं का क्रियान्वयन करना होता है। लेकिन खेतों में काम करने के बजाय इनमें से कुछ राजनीतिक कार्यक्रमों, सरकारी आयोजनों और मेलों में ही नजर आती हैं। वास्तविक कृषि कार्यों में इनकी भागीदारी बेहद सीमित रही है। इससे योजना की गंभीरता और क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सही मायने में 1,000 एकड़ का पायलट प्रोजेक्ट ड्रोन दीदी योजना की नींव है। इसके आधार पर आगे बड़े स्तर पर योजना को लागू किया जाना है।