उपमंडल के गांव चौटाला में विगत 11 जनवरी को डबल मर्डर मामले में जल्द कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार को ग्रामीणों ने पुलिस चौकी का घेराव कर नारेबाजी करते हुए रोष प्रदर्शन किया। अपने बच्चों को तीन दिन तक स्कूलों में न भेजने का फैसला किया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई न हुई तो आठ अप्रैल को सिरसा आगमन पर मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाए जाएंगे।
सोमवार को डॉ. केवी सिंह, आदित्य सिहाग, मुकेश सहारण, सुभाष कालीराणा, राजीव सिहाग, कश्मीर सहारण, अनिल पूनियां, भजन लाल वर्मा, दयाराम उलाणियां, पारिवारिक सदस्यों सतीश सहारण, कमल, नीरज, हर्ष, विरेंद्र, धर्मपाल, सूरजभान, सरपंच, पूर्व सरपंच, पंच, वार्ड मेंबर व सैकड़ों ग्रामीणों ने चौटाला चौकी का घेराव कर रोष प्रदर्शन किया। सूचना पाकर डीएसपी डबवाली रतनदीप बाली अपने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विगत 11 जनवरी को हुए चौटाला डबल मर्डर केस में अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है तथा पुलिस प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। पुलिस ने 11 मार्च को धरने के दौरान उनसे कुछ दिनों का समय मांगा था लेकिन अभी तक नतीजा शून्य ही है।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे पूर्व सरपंच कृष्ण बिश्नोई व अन्य ने उक्त हत्याकांड के पीछे गहरी साजिश का अंदेशा जताते हुए कहा कि पुलिस ने जिन तीन लोगों को आरोपित बनाया है। उनसे समस्त गांववासी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि जांच में तेजी लाई जाए और उचित कार्रवाई करते हुए दोषियों को गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार के सदस्यों सहित पूरे गांव में निराशा व खौफ का माहौल है। उन्होंने पीड़ित परिवार के सदस्यों को पुलिस सुरक्षा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आगामी तीन दिनों तक सभी ग्रामीणों से अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में न भेजने की अपील की। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सीमित समय अवधि में उचित कार्रवाई न की गई तो वे 8-9 अप्रैल को विरोध स्वरूप काले झंडे लेकर सिरसा में सीएम मनोहर लाल से मिलेंगे और समस्त प्रकरण की सीबीआई से जांच करवाने की मांग करेंगे। ग्रामीण करीब चार घंटे टैंट लगाकर चौकी के समक्ष डटे रहे। डीएसपी रतनदीप बाली ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि पुलिस द्वारा इस मामले में छापेमारी की जा रही है और जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस मौके पर ग्रामीणों की एक कमेटी का गठन किया गया।