सिरसा। नटार रोड स्थित श्री पंचमुखी बालाजी गो धाम में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें डाॅ. स्वामी दिव्यानंद महाराज भिक्षु ने शिरकत की। डाॅ. स्वामी ने कहा कि कथा का मतलब डांस करना या नाचना नहीं है। कथा का मतलब भगवान को समर्पण है। उन्होंने कहा कि दान को लोगों ने अलग-अलग नाम दे दिए हैं, लेकिन दान का कोई नाम नहीं होता।
निस्वार्थ भाव से जो किया जाए, वह दान नहीं भेंट होता है। स्वामी ने कहा कि आप लोग कृष्ण भगवान को तो छप्पन भोग लगाकर खाते हो और गाय माता के लिए मात्र 251 रुपये का दान करते हो तो भगवान कृष्ण खुश नहीं होंगे। क्योंकि गोमाता से ही भगवान कृष्ण का वजूद था। गोमाता का वास्तविक स्वरूप क्या है, इसके बारे में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए।
डॉ. स्वामी ने कहा कि भगवान कृष्ण गोचरण के लिए जाते थे तो नंगे पांव ही जाते थे। नंद बाबा व मैया यशोदा बुरा मानते थे। इस पर श्रीकृष्ण ने कहा कि जब आप लोग मंदिर में जाते हो तो चप्पल उतारकर जाते हो। तुम्हारे मंदिर में तो 3-4 देवता हैं, लेकिन गोमाता में 33 कोटि देवी-देवता हैं तो मैं चप्पल क्यों पहनूं।
स्वामी ने आह्वान किया कि अपने और परिवार जनों के शुभ अवसरों को गोशाला में मनाएं व अपने बुजुर्गों की पुण्यतिथि पर भी गोसेवा कर गोमाता व पितरों का आशीर्वाद लें। इस मौके पर गो प्रेमी सुमन मित्तल ने कहा कि एक हजार गज जगह और लेकर इस गो धाम का विस्तार किया गया है। इसके लिए आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने आह्वान किया कि वे गोवंश के लिए भूमिदान व तूड़ी के लिए सहयोग करें।
वहीं गो भक्त विनोद उपाध्याय ने कहा कि शहरवासी अपने घरों में खुशी के अवसरों पर फिजूल खर्ची के बजाय यहां आकर गोसेवा कर अपनी खुशियां साझा करें। इस मौके पर बालाजी संकीर्तन महिला मंडल की ओर से भजनों की अमृतवर्षा की गई। इस मौके पर सतीश केडिया, रमेश बंसल, सुरेंद्र सिंगला, रवि लीला, नरेंद्र बंसल, अमित, डाॅ. सुभाष नरूला, भूपेश मेहता, सुशील सैनी, श्याम सुंदर गुप्ता, पंकज मित्तल, दीपक बंसल, मनीष आदि मौजूद रहे।