नगर परिषद सिरसा की पूर्व चेयरपर्सन शीला सहगल ने अपने खिलाफ गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की हुई थी। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने इसे खारिज कर दिया। ऐसे में अब नप चेयरपर्सन के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है।
सिरसा नगर परिषद में करीब 31 पार्षद है। इसमें से 22 पार्षदों ने फ्लोर टेस्ट में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग की थी। अविश्वास प्रस्ताव पास करने के लिए करीब 21 पार्षदों का बहुमत जरूरी होता है। भाजपा की तत्कालीन चेयरपर्सन शीला सहगल के खिलाफ भाजपा के ही करीब नौ पार्षदों ने वोटिंग की थी।
ये था मामला
सिरसा नप के चुनाव 25 सितंबर 2016 को हुए थे। इसके बाद प्रधान पद के लिए चुनाव हुआ, जिसमें तत्कालीन भाजपा नेता राहुल सेतिया समर्थित शीला सहगल 12 दिसंबर 2016 को चेयरपर्सन चुनी गईं। शीला भाजपा की पहली महिला चेयरपर्सन थीं, लेकिन इसके बाद भाजपा पार्षद ने अपनी ही चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला दिया।
भाजपा के नौ पार्षदों के साथ पांच कांग्रेस, पांच हलोपा, तीन आजाद पार्षद भी थे। इसके बाद एक अगस्त 2018 को बैठक हुई, जिसमें 31 में से 22 पार्षदों ने प्रधान के खिलाफ वोट किया और प्रधान पद से हटा दिया। कांग्रेस समर्थित उपप्रधान रणधीर सिंह को प्रधान की शक्तियां मिल गईं और वे कार्यकारी प्रधान के तौर पर काम कर रहे हैं। तत्कालीन चेयरपर्सन शीला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्टे हासिल कर लिया, लेकिन इसके बाद चेयरपर्सन का चुनाव नहीं हो पाया। ऐसे में स्टे खारिज होने के बाद सिरसा नप के चेयरपर्सन का चुनाव होने के आसार बन गए हैं।
अभी आदेश नहीं आए। आदेश पढ़ने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
- अशोक गर्ग, डीसी सिरसा