सिरसा। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को एबीआरसी और बीआरपी के लिए प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षण-मूल्यांकन को डिजिटलाइज कर विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता का वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से आकलन सुनिश्चित करना रहा।
प्रशिक्षण में ब्लॉक एवं स्कूल स्तर के अकादमिक समन्वयक व संसाधन व्यक्तियों ने भाग लिया। डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से नियमित और त्वरित आकलन अपनाने से बच्चों की कमजोरियों की पहचान समय रहते की जा सकेगी और लक्ष्य-आधारित सुधारात्मक रणनीतियां लागू की जा सकेंगी।
कार्यक्रम का लक्ष्य मोबाइल एप के जरिये प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक आसानी से आकलन कर सकें, डेटा सहेज सकें और प्रगति की रिपोर्ट तैयार कर सकें रहा। राजकीय स्कूल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुछ चुनौतियों पर भी चर्चा हुई जैसे : स्मार्टफोन/डिवाइस की उपलब्धता, नेटवर्क कनेक्टिविटी और शुरुआती डिजिटल साक्षरता। मूल्यांकन कार्यक्रम 15 और 16 सितंबर को मेगा अभियान के रूप में चलाया जाएगा। इससे पहले शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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क्लस्टर लेवल पर आयोजित होगा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट किया गया कि अब यह मॉडल प्राथमिक राजकीय विद्यालयों तक विस्तारित किया जाएगा। अगले चरण में बीआरपी अपने-अपने क्लस्टर/ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को मोबाइल एप के उपयोग का प्रशिक्षण देंगे। साथ ही मास्टर ट्रेनर्स की ओर से तकनीकी सहायता और मॉनिटरिंग के लिए सहायक सामग्री उपलब्ध करवाई जाएगी।
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प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे
- डिजिटल आकलन ढांचा (फ्रेमवर्क) किस तरह से सीखने के संकेतक तय किए गए।
- किस तरह एप में कैसे मैप किया जाएगा।
- मोबाइल एप परिचय एवं हैंड्स-ऑन : एप पर टेस्ट बनाना, छात्र-प्रोफाइल बनाना।
- एप पर अंक दर्ज करना और तात्कालिक रिपोर्ट निकालना सिखाया गया।
- डेटा-विश्लेषण और रिपोर्टिंग : क्लास-स्तर एवं छात्र-स्तर की प्रगति रिपोर्ट, कमजोरी-वर्गीकरण और आवश्यकता अनुसार रेमेडियेशन प्लान तैयार करने के तरीके समझाए गए।
- प्रैक्टिकल केस-स्टडी : कुछ वास्तविक आकलनों के नमूनों पर काम करके एप के प्रयोग की प्रक्रिया दोहराई गई।
- प्रशिक्षुओं ने प्रश्न-उत्तर सत्र में अपनी शंकाएं क्लियर की।
प्रशिक्षण शिक्षा में डिजिटलीकरण की दिशा में एक ठोस पहल के रूप रखा गया। मूल्यांकन कार्यक्रम 15 और 16 सितंबर को मेगा अभियान के रूप में चलाया जाएगा। इससे पहले शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- डॉ. कपिल देव, जिला कोऑर्डिनेटर, एफएलएन सिरसा।