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कैश मिलना कठिन, अब ऑनलाइन बैंकिंग के सहारे ही लोग

Thu, 08 Dec 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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सिरसा। अब बैंकों से कैश निकलवाना युद्ध करने समान हो गया है। दिन-प्रतिदिन बैंकों में कैश की समस्या बढ़ रही है और कैश लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। हालातों को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि बैंकों में कैश की लंबे समय तक समस्या रहेगी। लोगों को अब अपने घरेलू खर्च चलाने कठिन हो गए हैं। ऐसे में एक मात्र ऑनलाइन बैंकिंग ही विकल्प है। लोगों को अब ऑनलाइन की बैंकिंग की आदत डालकर अपनी समस्याओं का हल करना होगा।
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जिले भर के बैंकों में इन दिनों कैश की किल्लत है। किसी भी बैंक में पर्याप्त कैश नहीं पहुंच रहा। लंबी लाइनों में लगे लोगों को मात्र चार-चार हजार रुपये कैश लेना पड़ रहा है जबकि लाइनों में लगे आधे लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। कैश निकलवाने की एक सप्ताह में 24 हजार रुपये सीमा निर्धारित की गई थी पर अब इस सीमा से काफी नीचे तक ही लोगों को कैश मिल पाता है। हर दिन कैश लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिले में 31 बैंक और 232 शाखाएं हैं सभी में एक जैसी स्थिति है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात और भी गंभीर हैं। गांवों की बैंकों में कैश न होने से किसानों और मजदूरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के पास कैश न होने के कारण वे मजदूरों की मजदूरी की राशि भी नहीं दे पा रहे हैं। इसके अलावा गेहूं की बिजाई के सीजन में किसानों को खेती पर होने वाले खर्च के लिए परेशानी हो रही है। घरों के खर्च के लिए न मजदूरों के पास, न किसानों के पास और न ही कर्मचारियों के पास कोई राशि है। ऐसे में हर वर्ग के समक्ष कैश की समस्या है। विवाह-शादीयों का सीजन है लोगों के पास शगुन देने के लिए भी रुपये नहीं हैं। कैश की समस्या के कारण बाजार सुनसान हो गए हैं। लोगों को अब लंबे समय तक कैश की कोई उम्मीद भी नहीं दिखाई दे रही न ही सरकार की ओर से कोई आश्वासन मिल रहा है।
सभी समस्याओं के हल के लिए लोगों को अब केवल ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए ही राहत मिल सकती है। फ्रेंडस कॉलोनी निवासी अमन सहारण ने बताया कि उन्होंने लोगों से दूध के रुपये लेने हैं। कैश का इंतजार करने के बाद आज से चैक के माध्यम से राशि लेनी शुरू की है। अब लोगों से चैक से राशि लेंगे तो देने वालों को भी चैक से ही देंगे। इसी प्रकार डीसी कॉलोनी निवासी नवीन कुमार ने बताया कि उन्होंने किसी दोस्त को 20 हजार रुपयेे देने थे। कई दिनों तक जब राशि नहीं मिली तो दोस्त के खाते में ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए राशि डाल दी है। नौकरीपेशा वाले मनीष कुमार ने बताया कि उन्होंने पांच हजार रुपये की देनदारी चुकानी थी। कई दिन तक बैंक में धक्के खाने के बाद जब कैश नहीं मिला तो आज उनसे बैंक अकाउंट नंबर पूछ कर नेट बैंकिंग कर दी और अपना कर्ज चुका दिया। इस विधि से आम लोगों को लेन-देन में ज्यादा समस्या नहीं आएगी पर बिल न काट कर टैक्स की चोरी करने वाले दुकानदारों को अब यह विधि रास नहीं आएगी। क्योंकि चैक से या ऑनलाइन पेमेंट लेने से उनका रिकॉर्ड बैंक में आ जाएगा और उन्हें रिटर्न भरते समय इसका हिसाब देना होगा इस लिए दुकानदारों को आज भी कैश ही भा रहा है।
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बैंकों और एटीएम के बाहर लगी लाइनें
हर रोज की भांति आज भी बैंकों और एटीएम के बाहर कैश लेने वालों की लंबी लाइनें लग गई। आज भी अधिकतर बैंकों में कैश की समस्या रही। जिन बैंकों में राशि आई उसे बंटने में ज्यादा समय नहीं लगा। इसी प्रकार एटीएम भी अधिकतर बंद रहे। कुछ एटीएम में राशि डाली गई जिनके समक्ष लंबी कतारों में लोग खड़े हो गए। महिलाएं भी अपने कामकाज छोड़कर लाइनों में दिखाई दे रही हैं। नौकरीपेशा महिला सुरक्षा रानी, मधु शर्मा व सुमन रानी ने बताया कि वे आज बैंक से कैश लेने के लिए छुट्टी लेकर प्रों में लगी हैं। आज कैश चार हजार रुपये ही मिला तो कल फिर छुट्टी लेकर लाइनों में लगेंगी। घर का खर्च चलाना है तो चार हजार रुपये में कुछ भी नहीं होता। हर रोज बस वाले को भी किराया देना होता है। दूधवाला एक तारिख से ही चक्कर काट रहा है। सब्जी व अन्य सामग्री महंगी है रोज रुपये खर्च होते हैं। छोटे-छोटे खर्च कैसे ऑनलाइन बैंकिंग से चलेंगे। उन्होंने बताया कि जब से नोट बंदी हुई है भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  
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पंचायत विभाग भी जुटा कैशलेश ट्रांजक्शन में
सिरसा। कैशलेश ट्रांजक्शन में जिला प्रशासन की पहल को पंचायत विभाग ने मूर्त रूप देना का निर्णय लिया है। जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी प्रीत पाल सिंह ने बताया कि गांवों में जाकर लोगों को कैशलेश ट्रांजक्शन के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे लोगों का समय भी बचेगा। उन्होंने कहा कि लोग बिजली का बिल भरने के लिए पहले बैंक में घंटों लाइन में लग कर कैश निकलवाते हैं और उसके बाद बिजली घर में घंटों लाइन में लगे रहते हैं। ऑनलाइन बिल भरने में घर बैठे व्यक्ति को कुछ ही मिनट लगेंगे। इसी प्रकार अन्य बिलों का भुगतान व देय को भी ऑनलाइन चुकाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में विभाग ने गांव गदली और नीलियां वाली को कैशलेश गांव बनाने का बीड़ा उठाया हैं। यहां हर दुकानदार को मशीन दी जाएगी जिससे लिए गए सामान की अदायगी डिजिटल विधि से होगी। इस पॉयलेट प्रोजेक्ट के बाद पूरे जिले में इस प्रकार की व्यवस्था की जाएगी। लोगों को एक बार ऑनलाइन पेमेंट भुगतान की आदत बन गई तो उसके बाद उन्हें स्वयं महसूस होगा कि यह विधि कितनी अच्छी है।
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कैशलेश ट्रांजक्शन विकल्प
जिला अग्रणी बैंक अधिकारी एमपी शर्मा ने बताया कि बैंकों में कैश की समस्या को देखते हुए कैशलेश ट्रांजक्शन विकल्प को अपनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि लोग कैशलेश ट्रांजक्शन के जरिए हम अपने सभी प्रकार के लेन-देन कर सकते हैं। लोगों को रुपयों का लेन-देन करने की सुविधा कैशलेश ट्रांजक्शन से मिल रही है। अब काफी लोग कैशलेश ट्रांजक्शन करने भी लगे हैं। बैंक और प्रशासन मिलकर रोज सेमीनार कर लोगों को समझा रहे हैं कि कैशलेश ट्रांजक्शन करना कितना कारगर साबित हो सकता है।
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रोड़ी क्षेत्र में लोग परेशान, लगे बैंकों की लाइनों में
रोड़ी क्षेत्र के गांवों में सात बैंक होने कारण लोगों को अभी तक नकदी लेने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि बैंक कर्मी अपने चहेतों को नकदी मुहैया करवा रहे हैं जबकि आम आदमी को नकदी लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कस्बा रोड़ी की एक महिला मनजीत कौर द्वारा बैंक कर्मियों पर आरोप लगाते हुए बताया कि बुधवार के दिन वह अपने छोटे बच्चे सहित स्टेट बैंक की ब्रांच में अपने खाते में से 1800  रुपये नकदी निकलवाने के लिए सुबह से लाइन में लगी थी काउंटर पर नंबर आने के उपरांत वाउचर काउंटर पर दिया तो बैंक बाबू ने मात्र दो सौ रुपये खुले देने की बात कही व दो हजार का नोट दिखते हुए कहा कि खुले रुपये नही हैं। मेरे मना करने पर बैंक बाबू ने तैश में आकर मेरी वाउचर दो फाड़ कर दिया। बार-बार मेरे कहने पर मेरी कुछ नहीं सुनी आखिर मायूस हो अपने घर वापिस आ गई। इसी प्रकार कई अन्य लोगों ने बताया कि बैंक कर्मी अपने चहेतों को लालच वंश नकदी घरों में रात बे रात मुहैया करवा देते हैं आम आदमी को नकदी न मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोड़ी में दो बैंकों द्वारा एटी एम की सहूलियत देते हुए भारतीय स्टेट बैंक व एच डीएफ सी बैंक द्वारा दो एटीएम लगाई गई हैं लेकिन उनमें लगभग दो सप्ताह से रुपये नहीं डाले गए। जिस कारण लोगों को पंजाब के कस्बा सरदूलगढ आठ किलोमीटर दूरी या 24  किलोमीटर कालांवाली तक का सफर तय करना पड़ता है। लोगों की मांग है कि कस्बा रोड़ी के बैंक की शाखाओं में शीघ्र नकदी का प्रबंध किया जाए।
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