फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पढ़ाई के बाद नहीं मिली नौकरी तो किसान ने शुरू की गेंदे और गुलाब की खेती

विज्ञापन
किसान दिनेश पूनिया । संवाद - फोटो : Sirsa
विज्ञापन
एग्रो पेज
विज्ञापन

नरेश बैनीवाल
चोपटा। 12वीं के बाद आईटीआई कर नौकरी की तलाश करने के लिए घर से निकले युवा को हर तरफ निराशा मिली, तो उसने अपने खेत से ही आमदनी करने की ठान ली। किसान ने परंपरागत खेती के साथ-साथ गेंदे और गुलाब के फूलों की खेती शुरू कर दी। इससे अब किसान को सीजन के अनुसार चार लाख रुपये की आमदनी हो रही है और दूसरे राज्यों के व्यापारी गुलाब और गेंदे के फूलों की खरीदारी कर ले जाते है।
नाथूसरी चोपटा क्षेत्र सेमग्रस्त होने के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में गांव नाथूसरी कलां (सिरसा) के किसान दिनेश पूनिया ने हौसला हारने के बजाय गुलाब व गेंदे के फूलों की खेती कर कमाई का जरिया खोजा। 12वीं तक पढ़े किसान दिनेश ने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए दो एकड़ में गेंदे व आधा एकड़ में गुलाब के पौधे लगाकर खेती शुरू कर दी। इससे फूल बेचकर परंपरागत कृषि के साथ अतिरिक्त आमदन शुरू हो गई। संवाद
विज्ञापन

12वीं के बाद किया था आईटीआई का डिप्लोमा
दिनेश पूनिया ने बताया कि उसने 12वीं तक की पढ़ाई करने के बाद आईटीआई से डिप्लोमा किया। नौकरी के लिए भी अप्लाई किया, लेकिन नहीं मिली तो उसने नौकरी के लिए भटकने के बजाय गांव मे काम करने का मन बनाया। तब उसने परंपरागत खेती के साथ फूलों की खेती करने की सोची। उसने हॉर्टिकल्चरल विभाग से डॉ. बलबीर सैनी से बागवानी की जानकारियां हासिल की। पूनिया ने बताया कि पांच साल पहले दो एकड़ में गेंदे व आधा एकड़ में गुलाब के पौधे लगाए। इससे उसे 4 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी हुई। दिनेश ने बताया कि 1 एकड़ में 40 से 50 क्विंटल गेंदे के फूल हो जाते हैं और गेंदे के फूल मांग के अनुसार 30 से 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक जाते हैं। इसी प्रकार गुलाब के फूल की मांग भी ज्यादा रहती है। उसने बताया कि गुलाब व गेंदे के फूल विवाह शादी या त्योहारों के अवसर पर ज्यादा बिकते हैं। परंपरागत खेती के साथ-साथ गेंदे का गुलाब के फूलों ने उसकी कमाई का ग्राफ बढ़ा दिया।
खुद ही देखभाल करता है और खुद ही चुनता है फूल
दिनेश पूनिया ने बताया कि उसने अपने खेत में ही ढाणी (रहने के लिए मकान) बना रखे हैं और सुबह जल्दी उठकर पौधों की देखभाल और फूल चुनने का कार्य शुरू कर देता है। पौधों की देखभाल से लेकर फूल तोड़ने तक का कार्य खुद ही करता है। उसने बताया कि खेत में खिले गुलाब व गेंदे के फूलों को देखकर उसे बहुत सकून मिलता है। फूलों को गीला व सूखा दोनों प्रकार से बेचा जाता है। ज्यादा काम होने पर वह मजदूरों का सहारा लेता है।
विज्ञापन

सिरसा में विकसित हो फूलों की मंडी
दिनेश पूनिया ने बताया कि उसके क्षेत्र के आस पास फूलों की मंडी न होने के कारण दिल्ली ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है। उसने बताया कि गुलाब के ताजा फूल सजावट के काम व सूखे फूल मिठाई आदि में डालने के काम आते हैं। उन्होंने बताया कि अब तो आसपास के किसानों का रुझान बढ़ने लगा है। उसका कहना है कि अगर फूलों की मंडी चोपटा, सिरसा में स्थापित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी।

किसान दिनेश पूनियां द्वारा उगाए गए फूल। संवाद- फोटो : Sirsa

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें