नगर परिषद ने मृत पशुओं को उठाने का ठेका तो छोड़ दिया, लेकिन मृत पशु कहां पर डाले जाएंगे, इसकी व्यवस्था नहीं की। ठेकेदार ने स्वयं के खर्च पर गांव झिड़ी में एक साल के लिए भूमि ली तो ग्रामीणों ने विरोध किया और प्रशासन ने वहां पर मृत पशु डालने पर रोक लगा दी।
ठेकेदार ने पहले ही चेतावनी दी कि अगर मृत पशु डालने की व्यवस्था न की गई तो वह पशुओं को नगर परिषद कार्यालय परिसर में डालना शुरू कर देगा। उसने ठीक वैसा ही किया और मृत पशुओं से लदा वाहन परिषद कार्यालय परिसर में खड़ा कर गया। इससे वहां बदबू फैल गई और लोगों का काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उधर, प्रशासन हड्डा रोड़ी की व्यवस्था करने में जुट गया है।
ठेकेदार सुनील कुमार उर्फ पप्पू ने बताया कि नगर परिषद क्षेत्र से मृत पशुओं को उठाने का ठेका परिषद की ओर से उसे एक जुलाई 2015 तक एक लाख 85 हजार रुपये में दिया था।
ठेके के नियम के हिसाब से उसे मृत पशु डालने के लिए जगह का प्रबंध अपने स्तर पर करना है और वह जगह हवाई अड्डे से 15 किलोमीटर दूर होनी चाहिए। सुनील ने बताया कि उसने जिस भी गांव में मृत पशु डालने के लिए जमीन को ठेके पर लिया दो-तीन दिन बाद ही ग्रामीणों द्वारा विरोध शुरू कर दिया जाता। उसने बताया कि हाल ही में उसने झिड़ी गांव में एक ग्रामीण से एक लाख बीस हजार रुपये में जमीन ली, जो गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर है। इस संबंध में गांव के सरपंच, नंबरदार आदि ने लिखित में हस्ताक्षर करके भी दिए कि उन्हें मृत पशु वहां डालने में कोई एतराज नहीं है, लेकिन कुछ ग्रामीणों ने बिना वजह इसका विरोध शुरू कर दिया। उसका कहना है कि ग्रामीणों ने स्वयं अपने स्तर पर गांव के ही एक धार्मिक स्थल के पास हड्डा रोड़ी बनाई हुई है, उस पर किसी को एतराज नहीं है, लेकिन उसने जो जमीन ली, वहां पर मृत पशु डालने का विरोध जता रहे हैं, जिससे उसे काफी नुकसान हो रहा है।
उसने बताया कि इससे पूर्व भी उसने नाथूसरी चोपटा, झोरडऱोही व नेजाडेला कलां में जमीन लेकर वहां मृत पशु डाले, लेकिन वहां के लोगों ने भी विरोध जताना शुरू कर दिया।
इस मुद्दे पर कई बार वह नगर परिषद ईओ और एसडीएम से मुलाकात कर जमीन दिलाने की मांग कर चुका है, लेकिन उसे जगह नहीं दिलाई जा रही। उसका आरोप है कि जिला प्रशासन उसकी समस्या दूर नहीं कर रहा, जिस कारण उसे गाड़ियों के तेल, मजदूरी और मृत पशु डालने के लिए लाखों रुपये देकर ली गई जमीन के रूप में नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उसने बताया कि वह अधिकारियों को पहले ही कह चुका था कि अगर जमीन नहंी मिली तो वह पशु परिषद कार्यालय में डालना शुरू कर देगा और उसने परिषद कार्यालय में ही मंगलवार रात्रि आठ मृत पशुओं से भरी गाड़ी को छोड़ दिया। उसने कहा कि अगर उसे फिर भी जमीन नहीं दिलाई गई तो वह लघु सचिवालय में ही मृत पशु डालना शुरू कर देगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
वर्जन
फिलहाल ठेकेदार मृत पशुओं को उठाकर ले गया है। साथ ही उसे जमीन तलाशने का आश्वासन दिया गया गया है। ठेकेदार ने बताया कि शाम को वह पशुओं को उठाकर ले गया है, अगर उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो लघु सचिवालय में पशुुओं को डालना शुरू कर देगा।
देेवेंद्र बिश्नोई, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर नप