संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा
गांव बकरियांवाली के कचरा निस्तारण प्लांट की अनियमितताओं को लेकर उपायुक्त आरके सिंह को समस्या समाधान शिविर में शिकायतें मिल रही थीं। उपायुक्त के आदेशों पर अलग अलग विभाग के अधिकारियों ने दो दिन तक प्लांट का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की। अधिकारियों की रिपोर्ट मिलने के बाद वीरवार को उपायुक्त ने गांव वालों के साथ विशेष रूप बकरियांवाली के कचरा निस्तारण प्लांट में संवाद किया। संवाद के दौरान उपायुक्त ने ग्रामीणों को कहा कि दो दिन की जांच रिपोर्ट में आपकी शिकायत सही पाई गई है। अधिकारियों को अनियमितताएं मिली हैं। आप लोग संतोष रखिये दोषियों पर कार्रवाई जरूर की जाएगी।
उपायुक्त ने ग्रामीणों को समझाया कि कचरा निस्तारण प्लांट की व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी प्रशासन और ग्रामीण दोनों की है। एजेंसी और अधिकारी दोनों मिलकर जल्द से जल्द कचरा निस्तारण का कार्य करेगी। ऐसा नहीं होता है तो आप लोग मुझे, पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों को शिकायत कर सकते हैं। इसके बाद उपायुक्त ने सभी ग्रामीणों के साथ कचरा प्लांट के अंदर और बाहर के हालात देखे। नगर परिषद के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि प्लांट में कचरा निस्तारण के कार्य में तेजी लाएं। वहीं इस दौरान पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड के आरओ विनोद कुमार ने बताया कि नगर परिषद को कोई एनओसी उनसे नहीं मिली है। जो कार्य चल रहा है बिना एनओसी के चल रहा है।
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जब उपायुक्त को गणित पढ़ाने लगा कर्मचारी
नगर परिषद की ओर से तकनीकी एक्सपर्ट जतिन कुमार उपायुक्त को मशीनों की क्षमता के बारे में बताने लगे। ग्रामीणों ने कहा कि कितने दिनों में निस्तारण हो जाएगा। तकनीकी एक्सपर्ट ने फिर मशीनों के बारे में बताना शुरू कर दयया। इस पर उपायुक्त आरके सिंह नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि मुझे मूर्ख समझा है क्या। मुझे गणित पढ़ा रहे हो। कितने समय में काम खत्म होगा , लोगों को यह बताओ। तकनीकी एक्सपर्ट ने कहा कि सॉरी सर। यह तो नहीं बता पाऊंगा।
डीसी से अधिकारियों व ग्रामीणों की बातचीत
उपायुक्त - प्लांट की जमीन किसकी है।
कार्यकारी अधिकारी - सरकार ने खरीदी है। नगर परिषद की है।
ग्रामीण सुभाष चंद्र - 2006 से लेकर 2024 आ गया है। कैंसर से लेकर विभिन्न बीमारियों के ग्रामीण चपेट में आ गए हैं।
उपायुक्त (कंसलटेंट धारणा तिवारी से) - आप डाटा दीजिए, क्या गांव के लोगों की जांच हुई है और इस तरह का कोई मामला सामने आया है।
तिवारी - अभी बताती हूं सर।
सुभाष चंद्र - गांव में कुछ समय पहले कैंप लगाया गया था। 146 ग्रामीणों की जांच हुई थी। जिसमें 60 लोगों को सांस, 48 लोगों को त्वचा रोग मिले, 7 लोगों को कैंसर की शिकायत मिली थी।
उपायुक्त - मैडम बताईये जो इन्होंने कहा है, सही है।
तिवारी - सुना नहीं सर। इन्होंने क्या बताया।
उपायुक्त - आप अभी ही गंभीर नहीं हो। बाद में आप कैसे व्यवस्था बनाएंगी।
तिवारी - सर। कूड़े को ट्रीट करेंगे। तभी समस्या का समाधान होगा।
उपायुक्त - प्लांट में डयूटी कौन देता है।
कर्मचारी - सर मैं देता हूं।
उपायुक्त - तेरे खिलाफ कार्रवाई होगी। बदमाशी करता है।
कर्मचारी - ग्रामीण सुभाष ने मेरे साथ लड़ाई झगड़ा किया था।
उपायुक्त - आज तुम कह रहे हो झगड़ा किया है। क्या उस दिन किसी अधिकारी को बताया था। आप किसी के पढ़ाने पर आकर बोल रहे हो।
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यह मिलीं खामियां
1 कचरा निस्तारण नहीं किया गया।
2 मशीन बंद पाई गई।
3. प्रतिदिन होने वाली हर्बल स्प्रे का छिड़काव नहीं किया गया।
4. फायर सिस्टम प्लांट में नहीं लगाया गया।
5. सुरक्षा को लेकर बेहतर प्रबंधन नहीं थे।
6. मलबे के बड़े बड़े ढेर लगे हुए थे।
7 पानी का व्यापक प्रबंधन नहीं था।
8. कचरे के निस्तारण के बाद का वेस्ट नहीं उठाया गया था।
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उपायुक्त ने यह दिए आदेश
1. पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड की ओर से लगाया गया जुर्माना तुरंत प्रभाव से नगर परिषद भरे।
2. कुत्तों को पकड़ने के लिए टेंडर लगाया जाए।
3 नियमानुसार पर्यावरण विभाग के साथ मिलकर एनओसी लें और कचरा निस्तारण का कार्य जल्द से जल्द शुरू करें।
4 आगजनी की घटनाओं से बचने के लिए पानी की व्यवस्था करें।
5. कचरा प्लांट के चारो ओर पेड़ लगाएं।
6 दो हजार मीट्रिक टन की क्षमता की मशीन लगवाएं।
7 निस्तारित मिट्टी को उठाने का कार्य करें।
8 ग्रामीणों को प्लांट में आने से कोई नहीं रोकेगा।
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यह आंकड़े आए सामने
कचरा निस्तारण की मशीनों की क्षमता - 500 मीट्रिक टन प्रतिदिन
कुल मशीन - दो मशीन
खराब पड़ी - एक मशीन
प्लांट में कुल कचरा - 2 लाख 13 हजार मीट्रिक टन
प्लांट की क्षमता के अनुसार इतने दिनों में होगा निस्तारण 426 दिन