संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर में बेसहारा और दुधारू पशुओं को लेकर जिलाधीश पार्थ गुप्ता ने धारा 144 लागू की है। इस धारा के तहत कोई भी व्यक्ति अपने पशुओं को बेसहारा नहीं छोड़ सकता। यदि कोई पशुपालक ऐसा करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधीश के आदेशों में स्पष्ट कहा गया है कि सर्दी के मौसम में कोहरा छाया रहता है। कई लोगों द्वारा अपने पशुओं को बेसहारा छोड़ दिया जाता है। इस कारण पशु सड़कों पर इधर-उधर घूमते रहते हैं। धुंध में पशु दिखाई न देने के कारण सड़कों पर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। इससे जान व माल को होने वाले नुकसान से इंकार नहीं किया जा सकता। जिलाधीश ने संबंधित सभी बीडीपीओ व कार्यकारी अधिकारी, सचिव से कहा है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में इस प्रकार पशुओं को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाएं, ताकि लोग पालतू पशुओं को बेसहारा न छोड़े। लावारिस पशुओं की वजह से सड़क दुर्घटनाएं होती रहती है। आदेश की अवहेलना करने वाला पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत दंड का भागी होगा।
वीरवार को शहरी स्थानीय निकायमंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान डंपिंग प्वाइंटों और सड़कों के बीचों बीच बेसहारा और दुधारू पशु बैठे नजर आए। रानियां रोड पर दुधारू पशुओं को डिवाइडर के साथ बांधा हुआ था। निकायमंत्री की गाड़ी को उनसे बचकर निकलना पड़ा। यह वह रोड है जो सीधे विधायक गोपाल कांडा के घर जाता है। इस पर सबसे ज्यादा दुधारु और बेसहारा पशुओं का जमावड़ा है। अधिकारी इन पशुओं को पकड़ने में नाकाम है, क्योंकि गोशालाओं ने पशु लेने से इनकार कर दिया है। ऐसे में यह पशु हादसों को न्योता देते नजर आते हैं।
तीन दिन में ठप हुआ अभियान, गोशालाओं ने पशु लेने से किया इंकार
शहर में बेसहारा व दुधारू पशुओं को पकड़ने केलिए नगर परिषद प्रशासन की ओर से तीन दिन अभियान पिछले सप्ताह में चलाया गया है। जिसमें 150 के आस पास टीम ने पशु भी पकड़े थे। वहीं प्रशासन ने 100 डेयरी मालिकों को नोटिस जारी किए थे। प्रशासन का यह अभियान उस समय फेल हो गया, जब गोशालाओं ने अपने हाथ खड़े कर दिये। गोशालाओं के साथ तीन बार हुई बैठक के बावजूद गोशाला संचालकों ने बड़े स्तर पर पशु लेने से इंकार कर दिया। ऐसे में 2 हजार के करीब बेसहारा व दुधारू पशुओं को गोशाला पहुंचाना परिषद अधिकारियों के लिए सिरदर्द बन गया है।