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Sirsa News: दादा लख्मीचंद फिल्म को मिली एक करोड़ की सब्सिडी तो जमाल में बंटी मिठाई

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 गांव जमाल में दादा लख्मीचंद की शूटिंग करते हुए फिल्म अ​भिनेता यशपाल शर्मा व अन्य कलाकार।
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चोपटा। हरियाणवी संस्कृति और लोक संगीत के प्रतीक दादा लख्मीचंद फिल्म पर आधारित फिल्म दादा लख्मीचंद फिल्म को हरियाणा सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी है। इससे खुश होकर जमाल के ग्रामीणों ने मिठाई बांटी है। इस फिल्म की कई महत्वपूर्ण दृश्य इसी गांव में शूट किए गए थे।
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अब यह सम्मान मिलने से गांववासियों की पुरानी यादें ताजा हो गई हैं। गांव के राजेंद्र कस्वां, दिवान खां, बशीरद्दीन, संजय शर्मा, भगत सिंह, जगसीर सहित बुजुर्गों और युवाओं ने बताया कि जब फिल्म की शूटिंग गांव में हो रही थी, तब पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल था। फिल्म की टीम ने यहां की गलियों, चौपालों और खेतों में फिल्मांकन किया था।
कई स्थानीय लोग भी अतिरिक्त कलाकारों के रूप में फिल्म का हिस्सा बने थे, जिससे गांव को एक नई पहचान मिली थी। सरकारी सम्मान से गांववासियों को गर्व की अनुभूति हो रही है। गांव के कलाकार जगत परदेशी ने कहा कि यह सिर्फ फिल्म की नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और गांव की पहचान को सम्मान मिला है।
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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने छह फिल्मों को सब्सिडी प्रदान की

प्रदेश सरकार की ओर से लागू की गई हरियाणा फिल्म नीति के तहत प्रदेश में फिल्मों के निर्माण को बढ़ावा देने और राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति को संरक्षित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने छह फिल्मों को सब्सिडी प्रदान की है। इनमें लोक गाथा ‘दादा लख्मीचंद’ को एक करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई है। इस अवसर पर मीता वशिष्ठ, यशपाल शर्मा, एमी विर्क, नुसरत भरूचा जैसे नामचीन कलाकार भी उपस्थित रहे। जमाल गांव के लोगों को उम्मीद है कि उनकी सांस्कृतिक धरोहर अब राष्ट्रीय स्तर पर और भी अधिक सराही जाएगी।
47 दिन तक चली थी फिल्म की शूटिंग
राजस्थान की सीमा से सटे गांव जमाल में सूर्य कवि पंडित लख्मीचंद के जीवन पर आधारित फिल्म दादा लख्मीचंद की शूटिंग हुई थी। शूटिंग की शुरुआत 16 मई 2019 को हुई, जो 47 दिन तक चली थी। हरियाणवी संस्कृति को पर्दे पर उतारने की इस अनूठी पहल की कमान मशहूर अभिनेता और निर्देशक यशपाल शर्मा ने संभाली थी। यशपाल शर्मा न सिर्फ इस फिल्म के निर्देशक हैं, बल्कि वे जवानी के दौर के दादा लख्मीचंद की भूमिका भी निभाई। लखमीचंद के जीवन के तीन मुख्य पड़ाव बचपन, किशोरावस्था और युवावस्था को फिल्म में दर्शाया गया।
100 साल पुराने मकान व पारंपरिक परिवेश के चलते जमाल को चुना
शूटिंग के लिए गांव जमाल को चुनने के पीछे ऐतिहासिक महत्व है। यहां के करीब 100 साल पुराने मकान और पारंपरिक परिवेश फिल्म की पृष्ठभूमि के लिए उपयुक्त बताया। इस चयन में हरियाणवी कलाकार जगत परदेशी की अहम भूमिका रही, जिन्होंने यशपाल शर्मा को जमाल आमंत्रित किया था। फिल्म की शूटिंग जमाल, बकरियांवाली, नाथूसरी कलां, दादा लख्मीचंद के गांव जाटी (सोनीपत) और मालकौष व खरक कलां (भिवानी) में हुई थी।
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