सामान्य अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा पटरी से उतर चुकी है। न तो स्वीकृत पदों की तुलना में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और न ही सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं। आधुनिक चिकित्सा सुविधा नहीं होने का खामियाजा आम जनता का भुगतना पड़ रहा है।
हर रोज करीब 250 से 300 मरीज अस्पताल में आते हैं। सीटी स्कैन व अल्ट्रासाउंड मशीन एक दशक से खराब पड़ी है। मरीजों को इन सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए मजबूर निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
सरकारी अस्पताल में उक्त सुविधाएं नि:शुल्क मिलती लेकिन सरकार द्वारा इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। निजी अस्पतालों में इन सुविधाओं के मनचाहे दाम वसूल किए जाते हैं। इन समस्याओं से दो-चार होने के अलावा अस्पताल में डॉक्टरों का टोटा भी जनता को झेलना पड़ रहा है। मौजूदा समय में सामान्य अस्पताल में 28 डॉक्टरों की जरूरत है लेकिन हैं 22 डॉक्टर। यह समस्या अब ओर ज्यादा गंभीर होने वाली है क्योंकि पांच डॉक्टरों को सस्पेंड किया जा चुका है। ऐसे में डॉक्टरों की कमी के चलते लोगों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी। वैसे ही मरीज इलाज के लिए अस्पताल में भटकते रहते हैं। अब उन्हें ओर अधिक समस्या का सामना पड़ेगा।
टीएमटी मशीन कंडम घोषित
हृदय रोगियों की जांच करने के लिए वर्ष 2000 में अस्पताल में टीएमटी मशीन आई थी। इस मशीन का इस्तेमाल दशक तक नहीं किया गया। परिणाम यह हुआ कि 11 सालों तक यह मशीन धूल फांकती रही और मरीज मजबूरन बाहर जाकर निजी लैब संचालकों से अपनी जेबों पर डाका डलवाते रहे। चिकित्सक अधीक्षक डॉ. सुभाषनी का कहना है कि उनके आने के बाद से कभी टीएमटी मशीन का इस्तेमाल नहीं हुआ। 2011 में कंपनी ने मशीन को पार्ट्स नहीं मिलने के चलते कंडम घोषित कर दिया था।
हर बार लिखा जाता है पत्र
स्वीकृत पदों के अनुसार जितने पद रिक्त हैं, उनकी भर्ती के लिए विभाग को हर माह पत्र लिखा जाता है। सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड मशीन नई भेजने के लिए भी बार-बार अवगत करवाया गया है। उम्मीद है जल्द ही अस्पतालों में डॉक्टरों और जरूरी आधुनिक सुविधाओं की कमी दूर हो जाएगी।
डॉक्टर सुभाषनी, चिकित्सा अधीक्षक।