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यातायात नियमों की अवहेलना करने पर नहीं थम रहा हादसों का सिलसिला

Fri, 16 Sep 2016 01:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
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यातायात - फोटो : bureau
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यातायात नियमों की अवहेलना के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। यातायात नियमों के मापदंड तो बना दिए पर उसका पालन करवाने के लिए विभागों में स्टॉफ की कमी है। हालांकि स्कूली वाहनों की जांच के लिए प्रशासन ने काफी दिनों तक मसक्कत की पर अब भी स्कूली वाहनों में सभी नियमों की पालना नहीं हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चे भी सुरक्षित माहौल में नहीं दिख रहे हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों से खचाखच भरे ऑटो हर दिन सड़कों पर दौड़ते दिखाई देते हैं।
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खास बात तो ये है कि जो वाहन सवारियों के लिए नहीं होते उनमें भी खचाखच भरी सवारियां सफर करती हैं। पुलिस चौराहों पर देखती रहती है। इतना ही नहीं लोग भी इन हादसों से सबक नहीं ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी वाहनों के लिए हिदायतें जारी की हुई हैं, लेकिन कोई इन हिदायतों की ओर ध्यान ही नहीं देते। नियमों की अनुपालन करवाने के लिए ट्रांसपोर्ट विभाग भी कर्मचारियों की कमी के कारण हांफता दिख रहा है। अभी तीन दिन पहले शहर के निकट हुए हादसे में सात लोगों की जान चली गई और 53 लोग घायल हो गए थे। भिड़ंत वाले दोनों वाहन ही सवारी वाहन नहीं थे, परंतु उनमें स्टोरी बनाकर लोगों को चढ़ाया हुआ था। इससे पूर्व भी इस प्रकार के अनेक हादसे हुए हैं। बोझा ढोने वाले वाहनों में सवारियां खचाखच भर कर बेपरवाह होकर चालक वाहनों को सड़कों पर दौड़ा रहे हैं।

स्कूली बच्चे असुरक्षित
भले ही प्रशासन ने स्कूली वाहनों पर शिकंजा कसा हुआ पर ऑटो में अब भी बच्चे असुरक्षित हैं। ऑटो स्कूली वाहन की श्रेणी में नहीं आते इस लिए स्कूली वाहनों के नियम इन पर लागू नहीं होते। खटारा ऑटो में 15 से 20 विद्यार्थी आपको मिल जाएंगे जबकि ऑटो केवल चार सीटर ही पास होते हैं। गत सर्दी के मौसम में हुए हादसे में एक दर्जन विद्यार्थी घायल हुए थे। इसके बाद इसी वर्ष में दो अलग-अलग हादसों में 10 विद्यार्थी घायल हुए। दो वर्ष पूर्व एक छात्रा की स्कूल बस से उतरते वक्त टायर के नीचे आने से मौत भी हुई थी।
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क्या कहते हैं अधिकारी
लोगों में यातायात के नियमों की पालना करने आदत बहुत कम है। हम दिन में भी रात को भी वाहनों की जांच करते हैं जो नियम तोड़ता है उसके खिलाफ कार्रवाई करते हैं। जो वाहन बोझा ढोने वाले हैं उनमें से तो सवारियों को बैठाया ही नहीं जा सकता। ऐसे वाहनों की धरपकड़ की जा रही है। पूरे जिले को संभालने के लिए कम से कम 60 आदमी चाहिएं और हमारे पास हैं मात्र छह आदमी। ऐसे में स्टॉफ की कमी बहुत आड़े आ रही है। जगह-जगह पर यातायात के नियमों के बोर्ड लगावाए गए हैं ताकि लोग उनको पढ़कर नियमों की पालना करने के आदी हों।  
प्रशांत अटकान, आरटीए

स्कूली वाहनों की जांच करवाई गई है। जो निर्धारित मापदंडों पर खरे उतर रहे थे उन्हीं की पासिंग हुई है। स्कूली वाहनों का मामला लगभग पटरी पर आ चुका है। फिर भी कोई शिकायत आती है तो कार्रवाई के लिए लिखा जाता है।
डॉ. यज्ञदत्त वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी

एक साल में 435 के काटे चालान
जिला परिवहन विभाग की ओर से एक साल में 435 वाहनों के नियमों की अवहेलना करने पर चालान काटे गए हैं। इनमें से 259 वाहन इमपाउंड किए गए हैं। विभाग ने एक साल में यातायात नियमों के अनुसार 82 लाख 65 हजार 950 रुपये के चालान काटे हैं। रात्रि को 13 वाहनों के चालान काटे गए हैं।
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ये हैं स्कूली वाहनों के लिए नियम
- सभी स्कूल वाहनों का रंग पीला होना चाहिए
- वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगे हों
- वाहनों में स्पीड गर्वनर फिट होने चाहिएं
- वाहन पर काले रंग से स्कूल बस और किराए पर है तो ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए
- सभी वाहन परमिट और अनुमति सहित होने चाहिएं
- स्कूल वाहन चालक का ड्राइविंग में पिछले पांच साल का अनुभव होना चाहिए
- वाहन चालक पर पिछले पांच सालों में ड्राइविंग के महत्वपूर्ण ऑफेंस न लगे हों
- वाहन का परिचालक और अटेंडेंट यूथ को हैंडल करने को लेकर प्रशिक्षित हो
- संस्थान में वाहनों की पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह हो
- स्कूल वाहन में प्रथम उपचार पेटिका हो
- वाहन पर रूट और स्कूल के नाम का बोर्ड लगा होना चाहिए
- वाहन के बाहरी और भीतरी साइड में पुलिस कंट्रोल रूम का व बस के मालिक का फोन नंबर अंकित हो
- वाहन के चालक व परिचालक का तीन साल में एक बार रिफ्रेशर कोर्स होना चाहिए
- वाहन के चालक का हर तीन साल में मेडीकल फिटनेस सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है
- वाहन के चालक और परिचालक यूनिफोर्म में हों और उस पर उनका नाम व लाइसेंस नंबर लिखा होना चाहिए
- वाहन की बैठने की सीटों से डेढ गुणा अधिक विद्यार्थियों को वाहन में नहीं चढाया जा सकता
- किसी प्रकार के नियम की अवहेलना करने वा संबंधित प्राधिकरण द्वारा वाहन की आरसी या चालक का लाइसेंस रद किया जा सकता है
- स्कूल वाहन पर निर्धारित शीशे के अलावा दूसरे शीशे नहीं होने चाहिएं
- एक अप्रैल 2014 के बाद और नए वाहन पर जीपीएस फिट होना चाहिए
- हर वाहन में दो सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिएं
- यदि वाहन में छात्राएं हों तो लेडिस अटेंडेंट होनी चाहिए
- वाहन को निर्धारित गति पर ही चलाएं


सभी वाहनों के लिए विभाग ने जारी की हिदायतें
- वाहन चलाते समय अपनी सीट बेल्ट पहनना सुनिश्चित करें
- दोपहिया वाहन चालक हेलमेट पहनें
- सर्टिफिकेट और बीमा के कागजात साथ रखें
- वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग करना निषेध है
- वाहन की गति सीमा बनाए रखें
- पार्किंग में ही वाहनों को खड़ा करें
- मोटर वाहन अधिनियम व न्यायालय की दिशा-निर्देश की पालना करें
- वाहन को निर्धारित गति पर ही चलाएं
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