खा है और इसलिए बलात्कारी की सजा का फैसला न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने 18 जुलाई तक सुरक्षित रखा है। सोमवार दोपहर अदालत दुराचारी किशोरी लाल की सजा का ऐलान करेगी।
मामले के अनुसार ऐलनाबाद के वार्ड नंबर छह निवासी 46 वर्षीय किशोर लाल ने 11 मई 2015 को क्षेत्र में घूमने वाली एक दिव्यांग नाबालिग को अपने घर ले आया। परिवार वाले बाहर गए हुए थे। उसने दिव्यांग को अपनी हवस का शिकार बनाया। जब किशोरी लाल गेट खोलकर नाबालिग को बाहर छोड़ने जाने लगा तो पड़ोस के कुछ लोगों ने उसे देख लिया। नाबालिग की हालत देखकर लोगों को आभास हो गया कि उसके साथ कुछ न कुछ गलत हुआ है। लोगों ने नाबालिग के परिजनों को बुलवाया और पुलिस को मामले की सूचना दी। पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल जांच करवाई तो उसके साथ बलात्कार की पुष्टि हो गई। पुलिस ने किशोरी लाल के खिलाफ रेप और पोस्को एक्ट के तहत केस दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया। करीब 12 महीनों तक चले इस मामले का निपटारा करते हुए एडीजे प्रवीण कुमार ने किशोरी लाल को दोषी करार देकर सजा का फैसला सुरक्षित रख लिया।
जज को इशारों से समझाई, जुल्म की दास्तां
रेप के इस मामले में सबसे ज्यादा मुश्किल पहलु पीड़िता दिव्यांग होना था। वह बोल कर कुल भी नहीं बता सकती थी, पीड़िता की गवाही ही दोषी को सजा दिलवाने के लिए सबसे अहम थी। गवाही पर पीड़िता अदालत पहुंची, अदालत ने निशक्त जनों के इशारों से उसकी बात समझने के लिए खास तौर पर एक विशेषज्ञ बुलाया। पीड़िता ने इशारों की भाषा से अदालत को सारी आपबीती बताई। घंटों चली गवाही के दौरान न्यायाधीश संगीता राय स्वयं पीड़िता की आपबीती जानकर हैरान रह गई। इंसाफ के लिए पीड़िता ने काफी साहस दिखाया।