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बच्ची से दरिंदगी, आखिरी सांस तक जेल में रखने की सजा

Sun, 08 Nov 2015 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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शनिवार को न्यायालय परिसर में मौजूद प्रत्येक शख्स की निगाहें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संगीता राय की अदालत ने ढाई वर्ष की मासूम बच्ची के साथ बलात्कार करने के बाद उसे उसकी हत्या का प्रयास करने के दोषी आजाद सिंह को मरते दम तक जेल में रखा जाए और उसका शव ही जेल से बाहर जाए। अदालत ने फैसले में स्पष्ट कहा कि जिस प्रकार का अति जघन्य अपराध किया गया इसके लिए मृत्यु दंड भी काफी नहीं है।
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रहम करो जज साहिबा
कटघरे में पहुंचते ही आजाद कुमार के चेहरे का रंग उड़ गया था। वह जोर से गिड़गिड़ा कर बोलने लगा 'जज साहिबा रहम करो, मैं मानता हूं मेरे से बड़ा जुर्म हुआ है लेकिन यह मेरा पहला अपराध था।

मेरे ऊपर इस केस के अलावा कोई मामला पुलिस में दर्ज नहीं है। मेरी मां बूढ़ी है, बच्चों का पालन-पोषण करने वाला मेरे सिवाय दूसरा कोई नहीं है। इसलिए मेरे पर थोड़ा सा रहम करो मैडम जी, सजा में थोड़ी नरमी बरतना।
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इसने हैवानियत की हदें पर कर दी
सरकारी वकील ओमप्रकाश ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि कटघरे में खड़ा से शख्स किसी की रूप में रहम का हकदार नहीं है।

मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और बाद में ईंट से हमला करके उसका सिर कुचलने से बड़ी हैवानियत क्या होगी। दोषी ने इंसानियत को शर्मसार किया है मिलॉड। इसपर किसी प्रकार का रहम नहीं किया जाए, बल्कि ऐसी कड़ी से कड़ी सजा दी जाए जिससे भविष्य में कोई भी इस प्रकार का अपराध करने से पहले लाख दफा सोचे।

बार ने भी फैसले को सराहा
अदालत का फैसला सुनने के बाद अदालत के बाहर खड़े लोगों ने सजा को सही ठहराया। बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एडवोकेट राहुल शर्मा ने कहा कि अदालत के फैसले ने समाज में एक संदेश दिया है।

ऐसे मामलों में रहम की गुंजाइश ही नहीं रखनी चाहिए। कोई भी समाज को शर्मसार करने का कृत करेगा उसके साथ न्यायपालिका सख्ती से पेश आएगी।


इससे बड़ी सजा क्या होगी

ये मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर था, इसमें वैसे तो ऐस प्रकार के मामलों में मौत की सजा का प्रावधान होना चाहिए, लेकिन फिर भी अदालत ने काफी कड़ी सजा सुनाई है। मैंने भी इसी प्रकार की सजा सुनाए जाने को लेकर अदालत में काफी दलील दी थी। दोषी को मरते दम तक यह अहसास होता रहेगा कि उसने कितना दरिंदगी वाला अपराध किया है।
ओमप्रकाश, सरकारी वकील।
ये था पूरा मामला
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चंडीगढ़िया मोहल्ला में 20 फरवरी 2014 की शाम एक ढाई वर्ष की बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान इंद्रपुरी मोहल्ला निवासी रिक्शा चालक आजाद कुमार बच्ची को टॉफी खिलाने का लालच देकर नेहरू पार्क ले गया। जहां जाकर उसने मासूम के साथ दुष्कर्म किया। शराब के नशे में धुत आजाद कुमार ने पास पड़ी ईंट उठाई और मासूम के माथे पर दे मारी। मासूम की चीख सुनकर लोग वहां पहुंचे और आजाद को पकड़ लिया। सिर पर ईंट के जोरदार वार से मासूम का सिर बुरी तरह से कुचला गया था। बच्ची पांच दिनों तक कॉमा में रही थी।
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