सरसाई नगरी में हो रही वारदातों पर अंकुश लगाने व आरोपियों की धरपकड़ में पुलिस पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
पुलिस बंदोबस्त व चौकसी पर चोरों का नेटवर्क भारी पड़ रहा है। शहर में रात्रि गश्त व जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरे भी बेसअर हो रहे हैं।
रिहायशी क्षेत्र, बाजार की दुकानें व निजी कार्यालय तक अपराधियों के निशाने पर हैं। चोरी की घटनाएं सिर्फ रात के समय नहीं, बल्कि दिन-दिहाड़े भी हो रही हैं।
कभी घरों के ताले टूट रहे हैं तो कभी मंदिरों के। हद तो इतनी हो चुकी है चोर सबसे सुरक्षित लघु सचिवालय स्थित सरकारी आवासों में भी सेंध लगाने से नहीं चूक रहे।
वर्ष 2015 की शुरुआत से ही चोरों का आतंक सिरसा वासियों को डराए हुए है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी 2015 से लेकर जारी नवंबर माह तक जिले में छीना-झपटी, चेन स्नेचिंग, घरों और दुकानों में चोरी की 550 से अधिक वारदातें हो चुकी हैं।
इस आंकड़े में जिले में एटीएम लूटपाट की वारदातें भी शामिल हैं, जिसे सुलझाने के लिए पुलिस ने एक लाख रुपये के इनाम तक की घोषणा कर रखी है।
हैरानी की बात तो यह है कई मामलों में पुलिस के पास चोरों के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध थे। उसके बाद भी पुलिस चोरों को पकड़ नहीं पाई है।
यह पुलिस की नाकामयाबी दर्शाने के लिए काफी है। पुलिस के लचर सुरक्षा के कारण सर्दी के आगमन के साथ ही चोरों के हौसले और बढ़ गए हैं।
पुलिस अधीक्षक डेढ़ माह की छुट्टी पर गए हुए हैं और फतेहाबाद की पुलिस अधीक्षक मुश्किल से सप्ताह में कुछ घंटे के लिए सिरसा आती हैं। ऐसे में पुलिस वाले मनमाफिक अपना कामकाज कर रहे हैं और इसका खामियाजा उठा रहे हैं शहरवासी।
सचिवालय के सरकारी आवास सुरक्षित नहीं
लघु सचिवालय जिले का सबसे अति सुरक्षित स्थान माना जाता है। यहां पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक व सेशन जज सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के दफ्तर व सरकारी आवास हैं।
यहां पर हर समय पुलिस की मौजूदगी रही है, लेकिन चोरों ने पुलिस के सुरक्षा बंदोबस्त को फेल करते हुए सचिवालय स्थित सरकारी आवास में सेंध लगाकर गत दिवस हजारों की चोरी की वारदात को अंजाम दे डाला।
पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर लिया, लेकिन अभी तक चोर पुलिस पकड़ में नहीं आए।
बीच सड़क होने लगीं वारदातें
18 नवंबर को हिसार रोड पर बदमशों ने एक वृद्ध महिला से बैग छीना और फरार हो गए। वृद्धा निर्माण कौर कुछ दिनों से दिल्ली में अपनी बेटी के पास मिलने गई हुई थी।
18 नवंबर की रात करीब वह बस से सिरसा पहुंची थी। उसके पास एक बैग था, जिसमें 21 हजार रुपये, बैंक की पासबुक, आधार कार्ड, कपड़े, मोबाइल तथा घर की चाबियां थी।
जैसे ही वह अपने घर की गली के पास पहुंची तो, गली के नुक्कड़ पर पहले से बदमाशों ने उसे धक्का देकर बैग छीनकर फरार हो गए। अभी तक यह मामला पुलिस सुलझा नहीं पाई।
इस वारदात से जनता में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है।
केस सुलझाने में असमर्थ पुलिस
साल 2014-15 में जिलेभर के पुलिस थानों में दर्ज केसों में पुलिस ने अनट्रेस रिपोर्ट का कुछ आंकड़ा जारी किया है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2014 से लेकर नवंबर 2015 तक पुलिस 40 मामलों को सुलझाने में नाकामयाब रही।
यह पुलिस का सरकारी आंकड़ा है। अन्य करीब 500 मामलों में अभी तक किसी गिरफ्तारी की बजाए पुलिस की जांच जारी है।
हत्या जैसे कई जघन्य केसों में सालों से पुलिस जांच कर रही है पर कातिलों का थोड़ा सा सुराग पुलिस अभी तक नहीं लगा पाई।
चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पुलिस की पैदल गश्त व राइडर की संख्या बढ़ा दी गई है। सर्द मौसम में चोरों के मनसूबों को विफल करने के लिए पूरी रात शहर थाना प्रभारी व तमाम चौकी इंचार्ज स्वयं अपनी टीम के साथ सारी रात गश्त पर रहेंगे।
इंद्राज सिंह, कार्यवाहक प्रभारी, शहर थाना सिरसा।