हुडा के प्लॉटों में आरक्षित कोटे का लाभ लेने के बाद लालच में आकर 12 लोगों ने विभाग के साथ धोखाधड़ी करके लाखों रुपये की धोखाधड़ी की। इस मामले में शिकायत मिलने पर हुडा के एस्टेट ऑफिसर ने धोखाधड़ी करने वाले इन प्लॉटधारकों के खिलाफ शहर थाने में शिकायत दी। पुलिस ने कार्रवाई शुरू करते हुए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। शुरुआत में तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।
आरक्षित कोटे में आने वाले लोगों को हुडा प्लॉट आवंटित करता है। वर्ष 2008 में फतेहाबाद जिले के गांव गोरखपुर निवासी नारायणी देवी के नाम सिरसा के हुडा सेक्टर 19 में प्लॉट आवंटित हुआ था। प्लॉट को नारायणी देवी ने बेच दिया। इसी प्रकार हिसार निवासी भले सिंह और राजाराम को भी वर्ष 2000 में हुडा सेक्टर 19 में प्लॉट आवंटित हुए और इन दोनों ने भी अपने प्लॉट बेच डाले।
इसके बाद इन्हें और लालच आ गया और उन्होंने हुडा से धोखाधड़ी की साजिश रची। तीनों ने फर्जी दस्तावेज बनाए और फिर से आरक्षित कोटे के तहत प्लॉट के लिए आवेदन कर दिया। हुडा की तरफ से इनको दो-दो प्लॉट आवंटित किए गए। इन प्लॉटों को भी आरोपियों ने बेच दिया और लाखों की कमाई की। हुडा को आरोपियों के संबंध में शिकायतें मिलीं। एस्टेट ऑफिसर हुडा ने जांच शुरू की तो पता चला कि इन लोगों ने फर्जी शपथ पत्र और दस्तावेज देकर हुडा से धोखाधड़ी की है। जांच में ऐसे 12 प्लॉट धारकों का पता चला, जिन्होंने आरक्षित कोटे का लाभ लेेने के बाद हुडा से धोखाधड़ी की।
एस्टेट ऑफिसर हुडा की तरफ से धोखाधड़ी से संबंधित काफी शिकायतें आई हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी के केस दर्ज करने आरंभ कर दिए हैं। आरोपी नारायणी देवी, भले सिंह, राजाराम के खिलाफ फर्जी शपथ पत्र, कागजात देकर धोखाधड़ी करने का केस दर्ज किया गया है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्त में लिया जाएगा। -अशोक कुमार, जांच अधिकारी एवं हुडा चौकी इंचार्ज