दो महिलाओं के आपसी मनमुटाव का खामियाजा दोनों के पतियों को उठाना पड़ा। छह-छह महीने जेल में रहने के बाद दोनों के पतियों को साथ-साथ सजा होने की नौबत तक आ गई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने विवेक के आधार पर फैसला सुनाते हुए एक-दूसरे की पत्नियों से बलात्कार के आरोपी पतियों को बरी कर दिया। न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने फैसला सुनाने के बाद दोनों से कहा कि मनमुटाव में इस प्रकार के संगीन आरोप लगाने से बचना चाहिए। परिवार संजोकर रखने की जिम्मेदारी पति-पत्नी दोनों पर होती है।
मंडी कालांवाली में दो महिलाओं के बीच आपस में विवाद हो गया। मनमुटाव इतना बढ़ गया कि 15 जुलाई 2015 को एक महिला ने दूसरी महिला के पति पर बलात्कार का आरोप लगाते हुए कालांवाली थाने मेें केस दर्ज करवा दिया। केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। करीब दो महीने बाद 10 सितंबर 2015 को जेल में बंद आरोपी की पत्नी ने उसके पति पर रेप का आरोप लगाने वाली महिला के पति पर उसके साथ घर में जबरन घुसकर बलात्कार करने का आरोप लगाया।
पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। करीब छह महीने जेल में रहने के बाद दोनों महिला के पतियों को अदालत से जमानत मिली।
अदालत में दोनों महिलाओं ने आरोपियों के खिलाफ गवाही भी दे दी। इस पेचीदा बलात्कार के क्रॉस मामले में वीरवार शाम अदालत को फैसला सुनाना था। सुबह से शाम तक अदालत के बाहर आरोपी पतियों की जान गले में अटकी रही। दोनों के वकीलों ने उनसे कहा कि उनका केस मजबूती से लड़ा गया है, लेकिन आखिरी फैसला जज साहब को ही करना है।
दोषी करार दिए गए तो सात-सात साल कैद दुष्कर्म मामले में कम से कम सजा होती है। शाम चार बजे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने अंतिम बहस सुनने के बाद विवेक के आधार पर फैसला सुनाते हुए एक-दूसरे की पत्नियों के साथ दुष्कर्म करने के आरोपी पतियों को बरी कर दिया। अदालत से बाहर आने पर दोनों पतियों ने राहत की सांस ली।