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उत्तर पुस्तिका घर ले जाने पर लॉ विभाग की छात्रा डीबार

Thu, 08 Oct 2015 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में लॉ विभाग की छात्रा द्वारा उत्तर पुस्तिका को घर ले जाने के मामले में तीन साल के लिए डीबार कर दिया गया है।
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अब यह छात्रा सीडीएलयू व इसके अंडर किसी अन्य कॉलेज में एडमीशन नहीं ले सकती और अन्य किसी यूनिवर्सिटी में अगर तथ्यों को छिपाकर यह छात्रा एडमीशन लेती भी है तो छात्रा पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो सकता है। इसके अलावा यूएमसी कमेटी ने छात्रा के सभी एग्जाम भी कैंसिल कर दिए गए हैं।

वहीं सीडीएलयू में स्मगलिंग का संभवत यह पहला मामला है। वहीं कानून की छात्रा द्वारा कानून तोड़ने से सभी हैरान भी हैं। सीडीएलयू की कंडक्ट ब्रांच में बुधवार को यूएमसी कमेटी मई 2015 में हुई परीक्षा के दौरान नकल केस में पकड़े गए छात्रों की सुनवाई की।
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मिली जानकारी के अनुसार लॉ विभाग की छात्रा ने चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए मई 2015 में परीक्षा दी थी। छात्रा ने पेपर के दौरान उत्तर पुस्तिका छिपा ली थी और उत्तर पुस्तिका न मिलने की बात कहकर परीक्षा हॉल में मौजूद प्राध्यापक से दूसरी उत्तर पुस्तिका मांगी और पहले वाली को छिपा लिया।

इसके बाद एग्जाम पूरा करने के बाद छात्रा घर से आने होने वाले पेपर के उत्तर उस उत्तर पुस्तिका पर लिख लाई। वहीं पहले दिन परीक्षा केंद्र से उत्तर पुस्तिका गायब होने से सभी प्राध्यापकों को सेंटर इंचार्ज ने अलर्ट कर रखा था।

जैसे ही पेपर खत्म होने के बाद छात्रा ने उत्तर पुस्तिका प्राध्यापक को पकड़ाई वैसे ही उत्तर पुस्तिका के ऊपर अंकित नंबर को देखकर प्राध्यापक यह भांप गया कि यह उत्तर पुस्तिका का नंबर वही है जो पहले वाले पेपर में गायब था। जिसकी तुरंत सेंटर इंचार्ज को दी गई और छात्रा को मौके पर ही पकड़ लिया और उस पर यूएमसी का केस बना दिया गया।

छात्रा पर नहीं दर्ज करवाई एफआईआर
जिस दिन उत्तर पुस्तिका परीक्षा केंद्र से गायब हुई थी उसी दिन सेंटर में सभी प्राध्यापकों को लॉ विभाग के अगले पेपर के लिए सतर्क कर दिया था।

अगले पेपर में छात्रा से बरामद हुई पुरानी उत्तरपुस्तिका मिलने पर सेंटर इंचार्ज को नियमों के तहत छात्रा पर एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए थी। स्मगलिंग का संभवत: पहला मामला होने और मामले को दबाने के लिए ऐसा नहीं किया गया। वहीं सीडीएलयू में नियमों के मुताबिक ऐसा होने पर दोषी विद्यार्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवानी होती है।

एक गलती से हुई पढ़ाई खराब
लॉ विभाग की छात्रा द्वारा ऐसी हरकत पर यूएमसी कमेटी ने इसे स्मगलिंग ऑफ आन्सर शीट माना है। नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए पांच सदस्यीय यूएमसी कमेटी ने छात्रा को तीन साल के लिए डीबार दिया गया है।

अब यह छात्रा न तो यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर सकेगी और न ही उसके अंडर किसी कॉलेज में दाखिला सकेगी। इसके अलावा छात्रा अगर किसी अन्य यूनिवर्सिटी में तथ्य छिपाकर दाखिला ले भी लेती है तो इसे धोखाधड़ी माना जाएगा और उस पर केस भी चल सकता है।

सेंटर हाईजेक करने का आया मामला
यूएमसी कमेटी के समक्ष नकल के लिए पूरा सेंटर हाईजेक करने का मामला सामने आया। इसमें करीब 72 विद्यार्थियों पर यूएमसी बनाई गई थी। पेपर चेकिंग के दौरान परीक्षक ने करीब 72 विद्यार्थियों की हुबहू उत्तर पुस्तिका मिलने पर करीब 72 विद्यार्थियों पर नकल का केस बनाया था।

यह सभी विद्यार्थी बीएससी चौथे सेमेस्टर के फिजिक्स और कैमेस्ट्री के थे। यूएमसी कमेटी के समक्ष यह मामला सामने आने पर पता चला कि यह सभी विद्यार्थी अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से है ऐसे में सेंटर हाईजेक का तो मामला ही नहीं बनता।

दूसरी और साइंस के विद्यार्थियाें की फारमूले तो एक जैसे ही मिलेंगे इस तथ्य को सामने रखते हुए यूएमसी कमेटी ने सभी 72 विद्यार्थियों को नकल रहित पाया। इन 72 विद्यार्थियों में करीब 10 छात्राएं थीं।
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पांच सदस्यीय कमेटी ने की सुनवाई
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय की पांच सदस्यीय यूएमसी कमेटी ने बुधवार को यूएमसी केस में फंसे विद्यार्थियों की सुनवाई की।

कमेटी के समक्ष 100 विद्यार्थियों ने पेशी भुगती जिसमें से करीब 80 विद्यार्थियों को सुनवाई के बाद नकल रहित पाया गया जिनको दोष मुक्त कर दिया गया। पांच सदस्यी कमेटी में डीन ऑफ अकेडमिक प्रोफेसर डॉ. विक्रम, प्रोफेसर डॉ. दीप्ती धर्माणी, एमएम कॉलेज फतेहाबाद की प्रोफेसर पूनम मिगलानी, हरि सिंह कॉलेज से सूबे सिंह और एग्जामिनेशन ब्रांच से मुन्नी देवी शामिल थीं।
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