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वीरवार को भेज देंगे बच्चों को स्कूल --विभाग ने ली राहत की सांस

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छह घंटे की बातचीत के बाद बच्चों को स्कूल भेजने के लिए माने ग्रामीण
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ओढां। क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल के अध्यापक द्वारा छात्राओं को अश्लील मूवी एवं साहित्य दिखाने का पिछले 4 दिन से चला रहा मामला बुधवार को काफी तूल पकड़ गया। ग्रामीणों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। लोगों ने पुलिस पर धक्केशाही के आरोप लगाए। सुबह से लेकर बाद दोपहर तक करीब छह घंटे की लंबी जदोजहद उपरांत आखिरकार ये मामला निपट गया। इसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है। वीरवार से सभी छात्र रोजमर्रा के अनुसार स्कूल में पहुंचेंगे।
बुधवार को स्कूल लगने के साथ ही दो गांव के विद्यार्थी स्कूल में पहुंच गए, लेकिन गांव से अधिकांश विद्यार्थी स्कूल में नहीं पहुंचे। गांव के कुछ लोगों ने अभिभावकों से अपने बच्चों को स्कूल न भेजने की बात कही। जिसके चलते कुल 173 विद्यार्थियों में से महज 35 विद्यार्थी ही स्कूल में पहुंचे। दूसरी ओर पुलिस को किसी ने सूचना दी कि कुछ युवक विद्यार्थियों को स्कूल जाने से रोक रहे हैं। थाना प्रभारी काशीराम बैनीवाल ने मौके पर पहुंचकर गली में बैठे कुछ युवकों को वहां न बैठने के लिए कहा। युवकों ने जब बात नहीं मानी तो पुलिस ने एक युवक को गाड़ी में बैठाना चाहा। इस बात पर काफी संख्या में लोग एकत्र हो गए और पुलिस का विरोध करते हुए धक्काशाही के आरोप लगाए। थाना प्रभारी ने लोगों को समझाया कि वे अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्हें स्कूल में भेजें। उन्होंने कहा कि स्थिति को नियंत्रण में करना पुलिस का कार्य है। इसलिए पुलिस के साथ बहसबाजी न कर इस मामले को यहीं खत्म करें। वहीं कार्यवाहक बीईओ हरमेल सिंह ने भी लोगों को समझाया कि इस मामले में पुलिस आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। विभाग ने आरोपी शिक्षक को टर्मिनेट कर दिया है और स्कूल के अन्य शिक्षकों पर लगे आरोपों की भी जांच की जा रही। इसलिए इस मामले को तूल न देकर बच्चों को स्कूल भेजें। दोपहर तक आरोपों प्रत्यारोपों के बीच चलता रहा। जिसके बाद कुछ गणमान्य लोगों ने गुस्साए लोगों के साथ बातचीत का दौर चलाया। लोगों ने अधिकारियों के समक्ष 6 मांगे रखीं। जिसमें कहा गया कि इस मामले में जिस भी अध्यापक का नाम आ रहा है उसके खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाए, स्कूल के स्टाफ की पूर्ति की जाए, स्कूल की चारदीवारी के पास घूमने वाले शरारती तत्वों पर नकेल कसी जाए, लड़कियों व लडक़ों की छुट्टी में 10 मिनट का अंतर रखा जाए व गांव की एक कमेटी का गठन किया जाए। बीईओ ने लोगों को समझाया कि वे समय-समय पर स्कूल का निरीक्षण करेंगे और सभी मांगे मानेंगे। सभी लोग सहमत हो गए।
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पुलिस आरोपी के खिलाफ पहले की कार्रवाई कर चुकी है और विभाग ने भी उसे टर्मिनेट कर दिया है। ग्रामीणों का कुछ मतभेद था, जो दूर करवा दिया गया है। स्कूल का समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा।
--हरमेल सिंह, कार्यवाहक बीईओ
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