सीडीएलयू के परीक्षा नियंत्रक की मौत पर प्रोफेसरों ने किया हंगामा
वीसी पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप ,गुस्साए प्रोफेसरों ने वीसी को कार्यालय से बाहर निकालने के लिए धकेला
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। सीडीएलयू के परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर प्रवीण अगमकर ने बुधवार सुबह साढ़े दस बजे विश्वविद्यालय परिसर स्थित अपने क्वार्टर में पत्नी की चुनरी से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। बाथरूम में उनकी चीख सुनकर पत्नी सुता ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन जवाब न मिलने पर उसने अपनी नौकरानी को बुलाया। नौकरानी ने भागकर गली में काम कर रहे माली और सिक्योरिटी गार्ड को आवाज दी। उन्होंने बाथरूम की कुंडी तोड़कर उन्हें निकाला और उन्हें सीडीएलयू की एंबुलेंस से सिविल अस्पताल पहुंचाया। जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और मोबाइल जब्त कर जांच शुरू कर दी। इस दौरान जहां पंद्रह प्रोफेसरों ने विरोध स्वरूप अतिरिक्त चार्ज छोड़ने की ई मेल राज्यपाल को भेज दी वहीं नान टीचिंग कर्मचारियों ने भी राज्यपाल हस्ताक्षर युक्त शिकायत भेज कर मामले की जांच की मांग की। इस दौरान कर्मचारियों, छात्रों ने भी वीसी के खिलाफ नारेबाजी की।
मूल रूप से छत्तीसगढ़ निवासी प्रो. प्रवीण अगमकर पत्नी सुता और बेटी ईवा के साथ रहते थे। घटना के समय बेटी स्कूल गई हुई थी। पुलिस ने परिजनों को सूचना देकर शव को सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा लिया है। गुरुवार को छत्तीसगढ़ से परीक्षा नियंत्रक के पारिवारिक सदस्य आएंगे, तब पोस्टमार्टम किया जाएगा। प्रोफेसर प्रवीण अगमकर सीडीएलयू में फिजिक्स पढ़ाते थे और उनके पास परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त चार्ज था। घटना की सूचना मिलने पर वीसी विजय कायत, रजिस्ट्रार असीम मिगलानी और सभी प्रोफेसर सिविल अस्पताल में पहुंचे। विश्वविद्यालय में अवकाश घोषित कर दिया गया।
वीसी अस्पताल से कार्यालय लौटे प्रोफेसरों ने दो घंटे किया हंगामा
वीसी विजय कायत सिविल अस्पताल से कुछ ही समय बाद वापस सीडीएलयू में अपने कार्यालय में आ गए। वहीं अपने साथी प्रोफेसर की मौत से गुस्साए प्रोफेसर एसके गहलावत, दिलबाग सिंह, ईश्वर मलिक, राजेश मलिक, अशोक मक्कड़, रविंद्र अहलावत करीब दोपहर एक बजे सीडीएलयू आए। वे कर्मचारियों के साथ वीसी कार्यालय में गए। उन्होंने वीसी विजय कायत को परीक्षा नियंत्रक की मौत का जिम्मेदार ठहराया। वीसी से कहा कि बजाए उसके परिवार को सांत्वना और श्रद्धांजलि देने के आप फाइलें निपटाने में लगे हुए है। प्रोफेसरों ने आरोप लगाए कि कि वीसी ने रिजल्ट जल्द देने के लिए परीक्षा नियंत्रक पर दबाव बनाया था। उसने कई बार रिजाइन दिया, जिसे वीसी ने नहीं स्वीकार किया और रिजल्ट के दबाव के चलते ही परीक्षा नियंत्रक प्रवीण अगमकर ने सुसाइड किया। मंगलवार शाम को भी वीसी ने परीक्षा नियंत्रक को बुलाया था, लेकिन वीसी ने इससे इंकार किया। वीसी ने कहा कि वे फाइल निकालने के लिए नहीं आए। बल्कि परीक्षा नियंत्रक के परिजनों को सूचना देने के लिए एड्रेस निकलवा रहे थे। इस दौरान दोनों पक्षों में बहस होती रही। प्रोफेसरों ने वीसी को कुर्सी छोड़कर कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहा और कहा कि विश्वविद्यालय का काम काज बंद किया जाए। वीसी ने इंकार कर दिया। तब प्रोफेसर दिलबाग सिंह गुस्से में पहले उनके चरणों की ओर लपके। वीसी पीछे हटे तो उन्हें पीछे से धकेलकर बाहर की ओर ले जाने लगे। इसी बीच सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें रोकना चाहा। तभी छात्र नेता कर्ण कसवां ने सिक्योरिटी गार्ड का हाथ पकड़ लिया। दोनों पक्षों में बात तू तड़ाक पर आ गई। गहमागहमी के बीच वीसी हताश होकर दूसरी कुर्सी पर बैठ गए। प्रोफेसर राजेश मलिक, अशोक मक्कड़, एसके गहलावत ने कहा कि आप परीक्षा नियंत्रक की मौत के जिम्मेदार हो। वो हमारा भाई था। वीसी ने कहा वह मेरा भी भाई था।
दिलबाग सिंह की पीए होरी लाल शर्मा और असिस्टेंट रजिस्ट्रार से हुई धक्का मुक्की
वीसी कार्यालय में जब प्रोफेसर, वीसी विजय कायत को कार्यालय से बाहर जाने के लिए कह रहे थे। ऐसे में प्रोफेसरों को गुस्सा आ गया। इसी दौरान प्रोफेसर दिलबाग सिंह की वीसी के पीए होरी लाल शर्मा से बहस हुई और फिर हाथा-पाई हो गई। दोनों ने एक दूसरे को धक्के मारे। अन्य कर्मचारियों ने दोनों को अलग किया। प्रोफेसर दिलबाग सिंह और अकादमिक सेल की असिस्टेंट रजिस्ट्रार मुन्नी के बीच भी बहस के साथ धक्का मुक्की हुई।
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प्रोफेसरों ने पुलिस से कहा वीसी कार्यालय को सील करो
सिटी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रोफेसरों को शांत कराया। तब प्रोफेसरों ने कहा कि वे इस मामले की जांच सीबीआई से करवाना चाहते हैं। वीसी ने कहा कि वे सरकार को सीबीआई जांच के लिए लिखेंगे। इसी बीच कर्मचारी नेता कुलदीप गहलावत ने कहा कि हमने पीए होरी लाल शर्मा और डिप्टी रजिस्ट्रार राजेश बंसल को हटाने के लिए आपको लिखा था, लेकिन आपने कार्रवाई नहीं की। तब वीसी ने प्रोफेसरों से कहा कि वे बाद में आपस में बैठकर इनके तबादले पर चर्चा कर लेंगे। कुलदीप गहलावत ने प्रोफेसर राजेश मलिक से कहा कि वीसी से लिखित में लें। तब वीसी ने कहा कि वह उन्हें आर्डर कैसे दे रहा है। वीसी ने अपने पीए को कर्मचारी नेता कुलदीप गहलावत के खिलाफ धमकी देने की शिकायत देने के लिए कहा। वहीं प्रोफेसरों ने सिटी थाना प्रभारी विनोद काजला से सारा रिकॉर्ड सील करने के लिए कहा। इस रिकॉर्ड में प्रोफेसर प्रवीण अगमकर से संबंधित फाइल हैं जो कि बाद में गायब हो सकती है। तब वीसी ने कहा कि उन्हें कोई ऐतराज नहीं है, रिकॉर्ड सील करवा दें। आप अभी सारा रिकॉर्ड इनके सामने ही छानबीन कर सकते हैं। वीसी कार्यालय में करीब दो घंटे तक हंगामा होता रहा।
छात्रों ने फूंका वीसी का पुतला
प्रोफेसर प्रवीण अगमकर की आत्महत्या के लिए वीसी को दोषी मानते हुए विश्वविद्यालय में वीसी का पुतला फूंका। प्रोफेसर, स्टूडेंट्स और नॉन टीचिंग कर्मचारियों ने वीसी के खिलाफ एसपी और डीसी को शिकायत दी। डीसी ने उन्हें लिखित में शिकायत देने के लिए कहा और उसे आगे भेजने पर सहमति जताई।
पंद्रह प्रोफेसरों ने विरोध स्वरूप अतिरिक्त चार्ज छोड़ने की गवर्नर को ई मेल भेजी
प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने डीएसडब्लू और डायरेक्टर पब्लिक रिलेशन, प्रोफेसर रविंद्र पाल ने चीफ वार्डन, प्रोफेसर एसके गहलावत ने डीन ऑफ रिसर्च और डायरेक्टर रेडियो का अतिरिक्त चार्ज छोड़ दिया। प्रोफेसर विक्रम सिंह ने डीन ऑफ कालेजिज, डायरेक्टर कंप्यूटर और रूसा का अतिरिक्त चार्ज छोड़ दिया। अशोक मक्कड़ ने एंटी रैगिंग कमेटी, डा. शैलेंद्र सिंह ने एडीएसडब्लू, डा. जेएस जाखड़ ने एफएए, डॉ. अभय सिंह ने कंवीनर एनएसएस,डा. राम मेहर ने हॉस्टल वार्डन, डॉ. अमित ने पीआरओ व डिप्टी परीक्षा नियंत्रक, डॉ. अशोक ने एसएससी, सुशील कुमार ने डायरेक्टर यूएसआईसी, धर्मवीर सिंह ने हॉस्टल वार्डन, पंकज शर्मा ने लाइब्रेरियन और प्रोफेसर सुल्तान सिंह ने डिस्टेंस एजुकेशन का अतिरिक्त कार्यभार छोड़ने संबंधी एक ई मेल राज्यपाल हरियाणा को भेज दी है। प्रोफेसरों ने कहा कि वे शिक्षा के अतिरिक्त कोई अन्य चार्ज नहीं लेंगे। जब तक सरकार वीसी विजय कायत को नहीं हटाती, तब तक वे विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे नहीं। उन्होेंने मांग की कि प्रोफेसर प्रवीण अगमकर की मौत की जांच सीबीआई से करवाई जाए।
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प्रोफेसर प्रवीण अगमकर पर जल्दी रिजल्ट निकालने के लिए किसी भी प्रकार का दबाव नहीं था। मेरे कार्यकाल में उन्होंने कभी भी अपने पद से इस्तीफा देने के लिए पत्र नहीं लिखा। वे मेरे भाई जैसे थे। मैं खुद मामले की निष्पक्ष जांच चाहता हूं। मैं कार्यालय में फाइल निपटाने के लिए नहीं आया, बल्कि परीक्षा नियंत्रक के परिजनों का एड्रेस सर्च कराने के लिए आया था। उनकी मौत के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराना गलत है।
विजय कायत, वीसी सीडीएलयू सिरसा।
फोटो 11 से 20