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गैंगस्टर छोटू भाट की पेशी को लेकर अदालत परिसर में कड़ी रही सुरक्षा

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वीडियो कांफ्रेंसिंग से कराई गैंगस्टर छोटू भाट की पेशी
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सिरसा। चौटाला डबल मर्डर मामले में आरोपी गैंगस्टर छोटू भाट की बुधवार को अदालत में पेशी को लेकर न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। सुबह से ही पुलिस कर्मियों व कमांड़ो दस्ते ने न्यायालय परिसर को घेरे रखा। सुबह 11 बजे सुरक्षा कारणों के चलते गैंगस्टर छोटू भाट को हिसार सेंट्रल जेल से सिरसा नहीं लाया गया और जेल से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उसकी पेशी अदालत में करवाई गई। इससे पहले सुबह जैसे ही अदालत खुलने का समय हुआ हथियारों से लैस पुलिस कर्मियों व कमांडो दस्ते की तैनाती अदालत परिसर के अंदर वह बाहर कर दी गई। गैंगस्टर छोटू भाट ने प्रशासन से खुद पर हमला होने की आशंका जताई हुई है। उसे शंका है कि पेशी के दौरान दूसरे गैंगस्टर उसकी हत्या करवा सकते हैं। सिरसा जेल मेें भी उसकी जान को खतरा बना हुआ था, इसलिए उसे सिरसा जेल से हिसार सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया। पेशी के दौरान हमला होने की शंका के चलते पुलिस को सुरक्षा के कड़े प्रबंध न्यायालय परिसर में करने पड़े। शहर थाना के कार्यवाहक प्रभारी सुभाष का कहना है कि छोटू भाट की पेशी को लेकर सुरक्षा के तमाम प्रबंध किए गए थे। कई गैंगस्टर उसपर हमला करने की कोशिश में है, ऐसी संभावना आरोपी छोटू भाट जता चुका है।
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्रोई ने करवाया था हमला
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्रोई ने दो सितंबर 2016 को छोटू भाट पर डबवाली कोर्ट में हमला करवाया था। तीन शूटरों ने पेशी के दौरान छोटू भाट पर गोलियां बरसाईं, इस हमले में छोटू भाट सहित दो पुलिस कर्मी गोली लगने से घायल हो गए। पैर पर गोली लगने से छोटू भाट की जान बच गई। राजस्थान पुलिस ने हमला करने वाले लॉरेंस बिश्रोई गैंग के तीन शूटरों को मुठभेड़ के दौरान बीकानेर में काबू कर लिया।
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हमले के जवाब में करवाया चौटाला डबल मर्डर
11 जनवरी 2017 को गांव चौटाला में हुए डबल मर्डर की साजिश जेल में रहकर गैंगस्टर छोटू भाट ने रची थी। इसका कारण यह था कि छोटू भाट पर डबवाली कोर्ट में जिन शूटरों ने गोलियां चलाईं, उनको चौटाला डबल मर्डर कांड में मरने वाले अमित सहारण ने कई दिनों तक शरण दी थी। इसी कारण छोटू भाट अमित सहारण से बदला लेना चाहता था। जेल में कैद रहे छोटू भाट ने शराब कारोबारी साथी गांव चौटाला निवासी गंगाजल उर्फ महेंद्र, कालू उर्फ मुखराम और मिंडा उर्फ सुखविंद्र को संदेश भिजवाकर साजिश को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी सौंपी। ये तीनों अमित सहारण की रेकी करने में जुट गए। रेकी का काम पूरा करने के बाद पांच शूटरों को सुपारी दी गई, जिन्होंने 11 जनवरी की रात को इनेलो नेता प्रदीप गोदारा के ऑफिस में फायरिंग की। जिसमें अमित सहारण और उसके साथ बैठे सतबीर पूनिया की मौत हो गई।
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