अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
तहसीलदार सिरसा से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना निर्धारित समय तक पूर्ण रूप से न देने के एक मामले को राज्य सूचना आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने इस मामले में सिरसा के उपायुक्त और सिरसा के तहसीलदार को नोटिस जारी करते हुए सात जून को आयोग के समक्ष हाजिर होने का आदेश दिया है।
सिरसा निवासी वरिष्ठ नागरिक मनोहर लाल जांगड़ा ने 29 जुलाई 2017 को तहसीलदार सिरसा के नाम आरटीआई के तहत एक आवेदन किया था, जिसमें उन्होंने पूछा था कि क्या भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1894 के तहत तहसीलदार द्वारा किसी बयनामा, हिब्बानामा और अन्य किसी वसीका का बिना दो गवाहोें के पंजीकरण किया जा सकता है। यदि हां, तो संबंधित नियमों और हिदायतों की सत्यापित प्रतिलिपि दी जाए। साथ ही यह भी पूछा था कि क्या तहसीलदार सिरसा द्वारा वसीका हिब्बानामा रजिस्टर्ड नंबर 4445 दिनांक 23 अक्तूबर 2017 को पंजीकृत करते समय अधिनियम के तहत दो गवाहियों संबंधी नियमों की पालना की गई थी।
जांगड़ा के अनुसार तहसीलदार सिरसा ने उक्त जानकारी उन्हें आधी-अधूरी उपलब्ध करवाई जिस कारण उन्होंने रिमाइंडर डाला। प्रथम अपील की गई, मगर कोई गौर नहीं हुआ। बाद में उन्होंने अपने अधिवक्ता पवन पारीक एडवोकेट के माध्यम से राज्य सूचना आयोग के समक्ष अपील दायर की। उस अपील पर आयोग ने संज्ञान लेते हुए उपायुक्त सिरसा और तहसीलदार सिरसा को नोटिस जारी करते हुए 18 मई 2018 तक इस मामले में जवाब दाखिल करने तथा सात जून 2018 को आयोग के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है।