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मां ने फोन करके पूछा कि बेटा कैसा है, पिता बोला वो तो चला गया

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सिरसा/ओढ़ां। ओढ़ां की आईटीआई में बुधवार को करंट लगने से इलेक्ट्रिक ट्रेड के छात्र लवप्रीत की मौत हो गई। 19 साल के लवप्रीत ने अपना 19वां जन्मदिन 25 मार्च को अपने परिवार के साथ ही मनाया था। सिटी अस्पताल में मृतक बेटे के पोस्टमार्टम की कार्रवाई करवा रहे पिता गुरमेल सिंह बेसुध हो गए। अपने बेटे की मौत के बाद नम आंखों से बताया कि 25 मार्च को उसके बेटे ने अपना 19वां जन्म दिन मनाया था। गुरमेल ने बताया कि 12वीं के बाद बेटा लवप्रीत कहता था कि इलेक्ट्रिक ट्रेड में आईटीआई करके अफसर बनना चाहता हूं। मैं तो राजमिस्त्री का काम करता हूं। आईटीआई करके छोटी मोटी सरकारी नौकरी करने लग जाता तो हमारे लिए वह कोई अफसर से कम नहीं था। गुरमेल ने बताया कि सुबह जब घर से गया तो कुछ ही समय बाद हादसे की सूचना मिली। वह भी आईटीआई में गया। पीछे से पत्नी ने फोन करके कहा कि बेटा कैसा है। मैंने कहा कि वो तो चला गया।
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इस घटना का शिकार हुआ जंडवाला जटान निवासी 19 वर्षीय लवप्रीत अपने पिता का इकलौता पुत्र था। उसकी छोटी बहन दसवीं में पढ़ती थी। लवप्रीत का पिता गुरमेल सिंह राजमिस्त्री का कार्य करता है। लवप्रीत ने 2015 में आईटीआई मेें दाखिला लिया था। लवप्रीत के पिता गुरमेल सिंह ने बताया कि उसका बेटा आईटीआई करने के साथ-साथ उसका खेती के कार्य में भी हाथ बंटाता था। गुरमेल सिंह ने इस हादसे के लिए कॉलेज प्रशासन को दोषी ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की है। लवप्रीत का देर सांय गांव जंडवाला जटान में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
22 फुट ऊंची थी लाइन, 25 फुट ऊंचा था आईटीआई का घोड़ा
आईटीआई की स्थापना 2015 में हुई थी। जबकि 11 हजार केवी की लाइन पहले से ही निकल रही थी। इस लाइन से आईटीआई और कुछ गांवों को बिजली मिलती थी। लेकिन लाइन का एक खंभा आईटीआई की चार दीवारी के अंदर स्थित था। लोहे का घोड़े की ऊंचाई 25 लाइन से ज्यादा थी। लाइन की ऊंचाई 22 फुट की थी। ऐसे में लोहे के घोड़े की ऊंचाई तीन फुट ज्यादा था। इसलिए वह टच कर गया। 11 हजार केवी की लाइन काफी साल पुरानी थी। आईटीआई के निर्माण के बाद इस लाइन को चार दीवारी के अंदर ले लिया गया। आईटीआई ने बिजली निगम को कभी भी इसे बाहर निकालने के लिए नहीं लिखा।
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सीन आफ क्राइम ने माना स्टाफ की लापरवाही के कारण हुआ हादसा
ओढां आईटीआई में घटित हुए इस मामले में प्रबंधन की घोर लापरवाही सामने आई है। चूंकि बिजली का काम करने वालों को किसी भी प्रकार के सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं करवाए गए थे। उनके पास न तो रबड़ के जूते थे और न ही रबड़ के ग्लब्ज। सीन आफ क्राइम ब्रांच के डॉ. अजमेर सिंह ने जांच करने के बाद बताया कि यह हादसा स्टाफ की लापरवाही के कारण हुआ है। इनके पास रबड़ के बूट व दस्ताने होना जरूरी था।
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कोट्स
लाइन काफी पुरानी थी। कभी भी आईटीआई प्रबंधन ने बिजली निगम को इस खंभे को बाहर हटाने के लिए नहीं लिखा। पूरा बिजली निगम को इस हादसे से दुखी है।
पुष्पेंद्र कौशल, एसडीओ, बिजली निगम।
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