जोहड़ किनारे डाली सल्फर की राख से 12 पशुओं की आंखें खराब
कालांवाली। उपमंडल के गांव देसूमलकाना में भाखड़ा नहर के नजदीक स्थित जोहड़ किनारे अप्रैल माह में डाली गई कनकवाल स्थित रिफाइनरी से निकाली गई सल्फर की राख से 12 से अधिक पशुओं की आंखें खराब हो गई। जिसके विरोध में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व पंचायत के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। उन्होेंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत करवाने के बावजूद भी जोहड़ के किनारे से राख को नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों हरदीप सिंह, सुरेेंद्र पाल सिंह, बघेल सिंह, बेसाख सिंह, संदीप सिंह, अमरजीत सिंह, गुरनाम सिंह, बिकर सिंह, सुबा सिंह ने बताया कि गांव के भाखड़ा नहर के नजदीक स्थित जोहड़ में गांव के करीब 40 घरों के लगभग 200 से अधिक पशु रोजाना ग्रामीण नहलाने के लिए लेकर जाते हैं। उसी जोहड़ में अप्रैल माह में रिफाईनरी प्रबंधकों की ओर से गांव के सरपंच से मिलीभगत कर रिफाइनरी से निकलने वाली सल्फर की राख के कई ट्रक जोहड़ के किनारे गिरवाई गई थी। पशु जोहड़ से नहाने के बाद जब बाहर निकलते हैं तो वे इस राख में लेटने लग जाते हैं। राख पर पानी पड़ने पर उससे काफी विषैला धुआं उठा। जिसके बाद ग्रामीणों ने एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया था और जोहड़ किनारे से राख उठाने की मांग की थी। लेकिन बावजूद इसके पंचायत की ओर से अब तक जोहड़ किनारे से विषैली राख नहीं उठाई गई। जिसके चलते उनके गांव की करीब एक दर्जन से अधिक पशुओं की आंखें बिल्कुल खराब हो गर्ई। उन्होंने बताया कि उनकी एक भैंस करीब एक लाख रुपये कीमत की है और अब उस भैंस को कोई भी नहीं खरीद रहा। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि उन्हें आर्थिक मुआवजा दिया जाए। कालांवाली के पशु चिकित्सक दीपक शर्मा ने बताया कि देसू मलकाना में कई पशुओं की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है। वे उनका उपचार कर रहे हैं। गांववासियों ने राख के कारण आंखें खराब होने की बात कही है। जिस कारण उन्होंने ग्रामीणों को उक्त जोहड़ में पशुओं को नहलाने के लिए रोक दिया है। वे राख की जांच करवाएंगे। ताकि इसका पता चल सके कि किस कारण पशुओं की आंखें खराब हुई है।