अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
बिना जांच रिपोर्ट आए 45 लाख ठगी की एफआईआर रद्द करने के मामले में सिरसा के एएसपी सहित पांच पुलिस अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सदर थाना पुलिस को नोटिस जारी करते हुए मामले से जुडे़ असली कागजात और सीजेएम कोर्ट में दाखिल किया सारा रिकॉर्ड तलब किया है। केस से जुड़ा रिकॉर्ड तलब करने के साथ 26 जुलाई 2018 को हाईकोर्ट में पुलिस अधिकारियों पर लगे आरोपों पर बहस होगी।
इससे पहले होईकोर्ट ने ठगी मामले के दस्तावेजों से छेड़छाड़ करके न्यायालय को गुमराह करने पर एएसपी विजय कक्कड़, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सतेंद्र गुप्ता, तत्कालीन डीएसपी दलीप सिंह, तत्कालीन सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार व एएसआई रामकुमार को 27 फरवरी 2018 को तलब कर चुकी है। सभी आरोपी अधिकारी हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे।
45 लाख रुपये की धोखाधड़ी मामले में कोर्ट के निर्देश पर सदर थाना पुलिस ने 4 दिसंबर 2015 को विदेशी कंपनी क्राउन क्रेडिट कॉर्पोरेशन सोसायटी लिमिटेड के एमडी सहित पांच आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। तब पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की और केस रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट जस्टिस एमएमएस बेदी ने सिरसा पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि नामजद आरोपियों पर दो माह के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपी जाए। सदर थाना के तत्कालीन प्रभारी एवं मौजूदा समय में डीएसपी दलीप सिंह, डीएसपी हेड क्वार्टर विजय कक्कड़ ने कोर्ट में लिखित रूप में बयान दिए, लेकिन सभी के बयान आपस में मिले नहीं। कोर्ट ने पीड़ित शमशेर के हस्ताक्षर की रिपोर्ट मधुबन फॉरेंसिक लैब से मांगी, उसमें जवाब आया है कि एस अक्षर से छेड़छाड़ की गई है और वो साफ नहीं दिखाई दे रहा।
कोर्ट ने सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार से पूछा कि जब कोर्ट से पुलिस ने हस्ताक्षर वाले दस्तावेज लिए थे तो उसमें हस्ताक्षर बिलकुल साफ हैं, ऐसे में छेड़छाड़ कैसे हुई। सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार के दाखिल जवाब से अदालत सहमत नहीं हुई। इसके बाद पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पीड़ित किसान शमशेर सिंह निवासी सिकंदपुर की याचिका व पुलिस की ओर से दाखिल किए जवाब पर संज्ञान लेते हुए आरोपी पुलिस अधिकारियों को तलब किया।
ये है मामला
विदेशी कंपनी क्राउन क्रेडिट कॉर्पोरेशन सोसायटी लिमिटेड की पंजाब के अमृतसर जिला के तरनतारन रोड पर दफ्तर है। साल 2011 में सिरसा के गांव सिकंदरपुर निवासी किसान शमशेर को उसके परिचित रोपड़ निवासी राकेश वर्मा ने बताया कि उक्त कंपनी चार सालों में रुपया डबल करके लोगों को देती है और बैंक आठ से दस साल में एफडी के नाम पर रुपया दोगुणा करके देते हैं। किसान शमशेर सिंह ने कंपनी कार्यालय में जाकर कंपनी के एमडी अमरीक सिंह से संपर्क किया और कंपनी की योजनाओं के संबंध में पूछा। अमृतसर निवासी एमडी अमरीक सिंह ने किसान शमशेर सिंह को बताया कि कंपनी चार साल में रुपया दोगुणा करके देती है। शमशेर सिंह एमडी के बातों पर विश्वास कर बैठा और 45 लाख रुपये का निवेश कंपनी की रुपये दोगुणा करने वाली पॉलिसी में कर दिया। अप्रैल 2015 में पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर किसान शमशेर सिंह कंपनी कार्यालय में अपने 90 लाख रुपये लेने पहुंचा। कंपनी के अधिकारी रुपया देने में टालमटोल करने लगे। कुछ दिनों तक शमशेर सिंह ने इंतजार किया और फिर कंपनी के दफ्तर में जाकर अपने रुपये मांगे। वहां उसे पता चला की कंपनी शाखा का एमडी लापता हो गया है। किसान शमशेर सिंह को खुद के साथ धोखाधड़ी का अहसास हो गया। उसने पुलिस थाने जाकर कंपनी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद शमशेर सिंह ने एसीजेएम पवन कुमार की अदालत में याचिका दायर करके न्याय की गुहार लगाई। अदालत ने फैसला सुनाते हुए पुलिस को कंपनी के एमडी अमृतसर निवासी जगजीत सिंह, अमरीक सिंह, रोपड़ निवासी बलजीत सिंह, मोहाली निवासी रजनीश कपूर व रोपड़ निवासी राकेश वर्मा के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया।