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चौटाला गांव के दोहरे हत्याकांड की सीबीआई जांच के आदेश

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पुलिस पर राजनीतिक दबाव के चलते जांच को प्रभावित करने का आरोप
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सिरसा। जनवरी 2017 में सिरसा के चौटाला गांव में हुए दोहरे हत्याकांड की जांच पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंप दी है। जस्टिस दया चौधरी ने यह आदेश मृतक की विधवा द्वारा दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किए हैं। जनवरी 2017 में चौटाला गांव में स्थित प्रदीप गोदारा के किन्नू वैक्सिंग प्लांट पर सतबीर पुनिया व अमित सहारण की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी।
मृतक की विधवा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है और राजनीतिक दबाव में प्रदीप गोदारा की इस प्रकरण में भूमिका की भी जांच नहीं हो रही है। गोदारा सिरसा जिले से संबंध रखने वाले हरियाणा के एक बड़े नेता के करीबी हैं। यह दोहरा हत्याकांड गोदारा के ही ऑफिस में हुआ था। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि जनवरी 2017 में दर्ज की गई एफआईआर में जांच एजेंसी ने जानबूझकर मास्टरमाइंड गोदारा की भूमिका जांचने का प्रयास नहीं किया। पुलिस ने इस मामले में छोटू भट को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में और शूटरों को भी गिरफ्तार किया लेकिन गोदारा पर पुलिस मेहरबान रही। याची ने आरोप लगाया कि जानबूझकर घटना से 1 दिन पहले सीसीटीवी कैमरों के तार काट दिए गए थे। आरोप है कि गोदारा आपराधिक पृष्ठभूमि का व्यक्ति है और पहले भी 29 अप्रैल 2006 को हुए चांद सिंह हत्याकांड में शामिल रहा है।
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मृतक अमित और उसकी बहन के बैंक अकाउंट के लेनदेन का भी जिक्र
याचिकाकर्ता ने कहा की पुलिस ने राजनीतिक संरक्षण के चलते गोदारा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मृतक अमित सहारण और उसकी बहन के बैंक अकाउंट के लेनदेन से हत्याकांड पर प्रकाश डाला जा सकता है क्योंकि इस पैसे का उपयोग 2015 में प्रदीप गोदारा के किन्नू वैक्सिंग प्लांट पर लगाने में किया गया। दूसरे मृतक की पत्नी ने भी यही शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों याचिकाओं को अदालत ने इकट्ठा कर दिया था। हालांकि गोदारा का कहना था कि यह हमला उनको टारगेट करके किया गया था और इस पूरे प्रकरण में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। पूरी बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अब सीबीआई जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
ये था पूरा मामला
11 जनवरी 2017 की रात करीब आठ बजकर 40 मिनट पर गांव चौटाला स्थित इनेलो नेता प्रदीप गोदारा की पीके फ्रूट कंपनी के ऑफिस में घुसकर कुछ बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। हमले में गांव चौटाला निवासी जमींदार सतबीर पूनिया और अमित सहारण की मौत हो गई थी। हत्याकांड के 15वें दिन सिरसा पुलिस ने खुलासा किया कि हत्याकांड की साजिश सिरसा जेल में ही रची गई, कई संगीन मामलों में अपराधी छोटू भाट मास्टर माइंड है। सिरसा के तत्कालीन एसपी सतेंद्र गुप्ता ने पत्रकारवार्ता कर दावा किया कि हत्याकांड को अंजाम देने वाले शूटरों के लिए रेकी करने वाले गांव चौटाला निवासी गांव गंगाजल उर्फ महेंद्र, कालू उर्फ मुखराम और मिंडा उर्फ सुखविंद्र को गिरफ्तार किया है।
पुलिस द्वारा बताई गई मर्डर की कहानी
जांच टीमों को पता चला कि सिरसा जेल में हत्याकांड की साजिश छोटू भाट ने रची। इसका कारण यह था कि छोटू भाट पर डबवाली कोर्ट में जिन शूटरों ने गोलियां चलाईं, उनको चौटाला डबल मर्डर कांड में मरने वाले अमित सहारण ने कई दिनों तक शरण दी थी। इसी कारण छोटू भाट अमित सहारण से बदला लेना चाहता था। पुलिस ने दावा किया कि जेल में कैद रहे छोटू भाट ने अपने शराब कारोबारी साथी गांव चौटाला निवासी गंगाजल उर्फ महेंद्र, कालू उर्फ मुखराम और मिंडा उर्फ सुखविंद्र को संदेश भिजवाकर साजिश को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी सौंपी। ये तीनों अमित सहारण की रेकी करने में जुट गए। अमित सहारण की प्रदीप गोदारा के साथ अच्छी दोस्ती थी, इसलिए वे उसकी पीके फ्रूट कंपनी के ऑफिस में हर रोज आता था। रेकी का काम पूरा करने के बाद पांच शूटरों को सुपारी दी गई, जिन्होंने 11 जनवरी की रात को प्रदीप गोदारा के ऑफिस में फायरिंग की। इसमें अमित सहारण और उसके साथ बैठे सतबीर पूनिया की मौत हो गई।
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न्याय की आस जगी
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हमें सिरसा पुलिस व क्राइम ब्रांच की जांच पर भरोसा नहीं था, दोनों ने इस मामले की सही ढंग से जांच नहीं की। अब हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी है। इससे हमें न्याय की उम्मीद जगी है। अब हत्याकांड के असल दोषियों के चेहरे सामने आ जाएंगे।
रविंद्र पुनिया, मृतक सतबीर पुनिया का भाई।
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