सीआईए डबवाली ने जिला सिरसा से होकर गुजरने वाली और गुजरात के मुंद्रा शहर से पंजाब के बठिंडा रिफाइनरी में जाने वाली कच्चे तेल की पाइप लाइन से तेल चोरी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। सोमवार को गिरोह के छह गुर्गों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों में से रोहित व प्रवीण को दो दिन के रिमांड पर लिया है, जबकि चार साथियों को चार दिन के रिमांड पर लिया है। गिरोह का मुख्य सरगना अभी फरार है। आरोपी रानियां के खारियां से करीब 15 से 17 टन कच्चा तेल निकालकर पंजाब में बेच चुके हैं। गिरोह के छह गुर्गों में चार पंजाब के, एक हरियाणा और एक यूपी का रहने वाला है। मुख्य सरगना सहित तीन की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह ने बताया कि बीती 15 जनवरी को रानियां थाना के गांव खारियां व 7 फरवरी 2021 को कालांवाली थाना के गांव जगमालवाली क्षेत्र में पाइप लाइन में वाल्व लगाकर तेल चोरी किया था। उन्होंने बताया कि इस संबंध में थाना रानियां व कालांवाली में तेल कंपनी के सहायक प्रबंधक विकास पारिक निवासी गांव गुढ जिला जोधपुर राजस्थान की शिकायत पर विभिन्न धाराओं के तहत अभियोग दर्ज किए गए थे। सीआईए डबवाली के इंचार्ज सब इंस्पेक्टर अजय कुमार की टीम को जांच सौंपी थी। पकड़े गए आरोपियों की पहचान रोहित निवासी रंधावा मसंधा जिला जालंधर पंजाब, संदीप निवासी संजय गांधी नगर जालंधर पंजाब, क्रांति उर्फ रामू निवासी सुरेना जिला गोंडा उत्तर प्रदेश, कुलविंद्र सिंह निवासी भगत सिंह कॉलोनी कैथल, मोहित निवासी रंधावा मसंधा जिला जालंधर पंजाब व प्रवीण कुमार निवासी जमालपुर कालोनी लुधियाना के रूप में हुई है। पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में सिरसा के खारियां गांव व जगमालवाली क्षेत्र व कैथल जिले में तेल चोरी का खुलासा किया।
22 रुपये प्रति लीटर बेचते थे तेल
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह के गुर्गों ने करीब डेढ़ साल पहले रानियां के खारियां गांव में एक किसान के खेत में पाइप लाइन में वाल्व लगाई थी। जनवरी 2021 में तेल कंपनी के अधिकारियों को मामले की जानकारी मिली थी। जब खुदाई की गई तो पाइप लाइन में करीब डेढ़ इंच की वाल्व लगी मिली थी। आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि गिरोह के गुर्गे रानियां से करीब 15 से 17 टन कच्चा तेल चोरी कर चुके थे। जिसे पंजाब में करीब 22 रुपये प्रति लीटर के दाम पर बेचते थे।
सांकेतिक बोर्ड से करते थे खेत का चयन
गिरोह के गुर्गे इतने शातिर थे कि वे खेत में से गुजर रही पाइप लाइन की तलाश के लिए सांकेतिक बोर्ड देखते थे और उसी के आधार पर एकांत खेत का चयन करते थे। गिरोह के सदस्य तेल चोरी करने के लिए हमेशा अंधेरी रात को प्रयोग करते थे। चांदनी रात में वे तेल चोरी नहीं करते थे। एक दूसरे को साइन देने के लिए बैटरी का प्रयोग किया जाता था। मोबाइल पर बात नहीं करते थे। तेल चोरी के लिए लोहे के सरिया से ही खुदाई करते थे। खेत मालिक को खुदाई का शक न हो, इसलिए मिट्टी को कट्टों में भरकर ही रखते थे। तेल चोरी करने के लिए पाइप का प्रयोग करके कच्ची सड़क पर तेल टैंकर खड़ा करके उसे भरते थे। तेल का टैंकर प्रवीण का होता था। गिरोह के सदस्यों को तेल पाइप लाइन में वाल्व लगाने के लिए वेल्डिंग सेट का प्रयोग करने के लिए बिजली का प्रबंध चाहिए था, इसलिए तेल चोरी वाली जगह के नजदीक ट्यूबवेल का कनेक्शन देखते थे, ताकि बिजली का प्रबंध मिले। इसके लिए पेशेवर वेल्डिंग मेकेनिक रखते थे।
लेन-देन में बिगड़ी हुआ तो हुए असफल
गिरोह के गुर्गों ने जब पहले रानियां में तेल चोरी की वारदात को अंजाम दिया तो मुख्य सरगना के साथ गिरोह के अन्य साथियों की पैसों के लेन-देन को लेकर बात बिगड़ गई थी। इसी के चलते ही जगमालवाली में गिरोह के गुर्गे तेल चोरी करने में सफल नहीं हो पाए।