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ट्रांसफार्मर का सामान चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के चार गुर्गे गिरफ्तार

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सीआईए कालांवाली ने ट्रांसफार्मर का सामान चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के चार गुर्गों को काबू कर 83 वारदात का खुलासा किया है। आरोपियों के कब्जे से दो गाड़ियां व औजार बरामद किए गए हैं। पकड़े गए आरोपियों की पहचान त्रिलोक सिंह, सुखदेव सिंह उर्फ राजू निवासी रावला मंडी राजस्थान, मांगे लाल व सुखविंद्र सिंह उर्फ सोनू निवासी 16 केएनडी घड़साना जिला गंगानगर राजस्थान के रूप में हुई है। आरोपियों को मंगलवार को अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें छह दिन के रिमांड पर भेज दिया गया। आरोपी त्रिलोक के खिलाफ राजस्थान में भी एक केस दर्ज है।
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जिले में करीब 150 ट्रांसफार्मरों का सामान चोरी हो चुका है। सामान चोरी का सिलसिला सर्दियों में शुरू हुआ था। गिरोह के गुर्गों ने डबवाली, कालांवाली, ओढां व नाथूसरी चोपटा क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर का सामान चोरी किया है। एसपी भूपेंद्र सिंह ने खुलासा करते हुए मीडिया को बताया कि आरोपियों ने प्रारंभिक पूछताछ में डबवाली, कालांवाली, ओढां व नाथूसरी चोपटा, फतेहाबाद जिले के भट्टू और पंजाब व राजस्थान क्षेत्रों से ट्रांसफार्मर का सामान चोरी करने की वारदात करनी स्वीकार की है। आरोपियों ने पूछताछ में अब तक 83 वारदात करनी कुबूल की हैं। आरोपियों से दो गाड़ियां भी बरामद हुई हैं। गिरोह को पकड़ने में वाली टीम में सीआईए कालांवाली प्रभारी राजपाल, सहायक उप निरीक्षक अवतार सिंह, मदन, रामफल शामिल थे।
लॉकडाउन में दिल्ली में नौकरी छोड़कर ट्रांसफार्मर चोरी के धंधे में लग गया त्रिलोक
गिरोह के गुर्गे त्रिलोक ने इलेक्ट्रिकल में डिप्लोमा किया हुआ है। वह पहले दिल्ली की एक बिजली की कंपनी में काम करता था। लॉकडाउन में वह नौकरी छोड़कर आ गया। इसके बाद उसने सुखदेव, मांगे लाल व सुखविंद्र सिंह के साथ मिलकर ट्रांसफार्मर का सामान चोरी करना शुरू कर दिया। आरोपी ने बताया कि वे पहले बसों में सिरसा आते थे और दिन में रेकी करने के बाद रात को ट्रांसफार्मर का सामान चोरी करते थे। त्रिलोक ने बताया कि वह बिजली के तार काटने का काम करता था। ट्रांसफार्मर से तांबा निकालने के बाद वे बस में सवार होकर अपने एरिया में चले जाते थे। जबकि तेल को मौके पर ही बिखेर देते थे। एक ट्रांसफार्मर में करीब 25 किलो तांबा निकलता है, इसे वे बीकानेर में ले जाकर आधे दाम 300 से 350 रुपये प्रति किलो बेचते थे। जैसे-जैसे पैसे कमाने लगे तो गिरोह ने मोटरसाइकिल पर वारदात को अंजाम देना शुरू कर दिया। ज्यादा पैसे कमाने के बाद गाड़ियां भी ले ली। ट्रांसफार्मर चोरी करने के लिए वे सुनसान जगहों पर लगे ट्रांसफार्मर देखते थे।
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