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मोडियाखेडा गोली कांड में सभी आरोपी बरी, इनेलो नेता संदीप चोयल को लगी थी गोली

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अक्टूबर 2014 के विधानसभा चुनावों में मतगणना के दिन गांव मोडिया खेड़ा में इनेलो नेता संदीप चोयल पर गोली चलाने के मामले में अतिरिक्त सेशन जज की अदालत ने बुधवार को चारों आरोपियों को बरी कर दिया है। बरी होने वाले युवक राकेश उर्फ मुन्ना, हरपाल, कर्मवीर और अनमोल है। यह मामला काफी चर्चित था। हालांकि पुलिस ने इस मामले में तत्कालीन भाजपा उम्मीदवार सुनीता सेतिया के पुत्र व युवा नेता गोकुल सेतिया को भी आरोपी बनाया था। लेकिन गोकुल सेतिया शुरू से ही कह रह थे कि उनके खिलाफ साजिश के तहत ये केस दर्ज करवाया गया था। पुलिस जांच में गोकुल सेतिया को क्लीन चिट मिल चुकी थी। कोर्ट ने अब इस मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया। पुलिस ने इनेलो के युवा नेता संदीप चोयल की शिकायत पर ये केस दर्ज किया था।
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ये था पूरा मामला
अक्टूबर 2014 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की उम्मीदवार सुनीता सेतिया थी। युवा नेता गोकुल सेतिया को मोडिया खेड़ा में बूथ कैप्चरिंग की सूचना मिली। तब गोकुल सेतिया अपने समर्थकों सहित वहां पर पहुंचे। लेकिन वहां पर इनेलो समर्थकों और भाजपा समर्थकों में झगड़ा हो गया। इसी झगड़े में इनेलो नेता संदीप चोयल को गोली लग गई। संदीप चोयल को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वहीं गोलीकांड के बाद मोडिया खेड़ा में कुछ घंटे मतदान रुका रहा। मोडिया खेड़ा निवासी शिकायतकर्ता संदीप चोयल ने पुलिस को बयान दिए थे कि वोटिंग के दिन गांव मोडिया खेड़ा में वह पोलिंग बूथ पर एजेंट था। इसी दौरान भाजपा उम्मीदवार सुनीता सेतिया के पुत्र गोकुल सेतिया अपने समर्थकों के साथ मौके पर आए और उनके साथ मारपीट की। तभी गोकुल सेतिया ने उस पर गोलियां चला दी जोकि उसके हाथ और पेट पर लगी। पुलिस ने इस मामले में गोकुल सेतिया सहित, राकेश उर्फ मुन्ना, हरपाल, कर्मवीर व अनमोल के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया था। हालांकि बाद में पुलिस जांच में गोकुल सेतिया को क्लीन चिट मिल गई थी। लेकिन उनके समर्थकों पर मामला दर्ज रहा।
गोकुल सेतिया 2019 के विधानसभा चुनाव में इनेलो के समर्थन से लड़ चुके हैं चुनाव
भाजपा से टिकट न मिलने पर युवा नेता गोकुल सेतिया 2019 के विधानसभा चुनावों में सिरसा से निर्दलीय चुनाव लड़े। निर्दलीय चुनाव में इनेलो ने उनका समर्थन किया और अपना उम्मीदवार नहीं उतारा। कोर्ट का यह फैसला सेतिया समर्थकों के लिए राहत भरा है।
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