पीएम स्वनिधि योजना के तहत फार्म भरने वाले कम्प्यूटर ऑपरेटर से पैसा मांगने का मामला आया सामने
- डबवाली, ऐलनाबाद और सिरसा में वसूली का आरोप, एडिशनल मिशन डारेक्टर सुडा ने जिला नगर आयुक्त को जांच के दिए आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के आवेदन फार्मों को सत्यापित करने के बदले 100 से 500 रुपये योजना अधिकारी द्वारा मांगने का मामला सामने आया है। इस मामले में कम्प्यूटर सेंटर संचालक ने स्टेट अर्बन अथॉरिटी के डायरेक्टर से शिकायत की है। शिकायत में हवाला दिया है कि उसके पास अधिकारी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। न्याय न मिलने पर वह मुख्यमंत्री की ग्रीवेंस बैठक में इन्हें प्रस्तुत करेंगे।
इसी शिकायत के आधार पर नगर परिषद में खलबली मची है। इस मामले में अधिकारियों को जांच कर एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट मुख्यालय भेजनी है। यह पहला मामला नहीं है जब भ्रष्टाचार को लेकर नगर परिषद में किन्हीं कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं। इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं।
सेक्टर-19 निवासी शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा कि नगर परिषद के सिरसा के कार्यालय नंबर-8 में एनयूएलएम के कर्मचारी हैं। वह प्रधान मंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर योजना जो प्रधानमंत्री स्वनिधि के नाम से है, उसके इंचार्ज हैं।
वह प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के आवेदन फार्म सत्यापित करने के लिए पहले 30 रुपये प्रति फार्म लेते थे। 1 मई 2026 से फार्म को सत्यापित करने के लिए 100 रुपये प्रति फार्म की मांग रख दी। शुरुआत में लोगों ने अपना व्यवहार व काम प्रभावित न हो। इसलिए 100 रुपये देने शुरू कर दिए।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कर्मचारी ने सिरसा से ऐलनाबाद व डबवाली तक नगर परिषद, पालिका व गांवों में अपनी सेटिंग की हुई है। कोई भी उनका विरोध नहीं कर सकता है क्योंकि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के एडमिन हैं।
आवेदन फार्म को सत्यापित करना और रिजेक्ट करना उन्हीं के हाथों में है। इस कारण कोई उनके खिलाफ आवाज नहीं उठा सकता है। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह एक गरीब आदमी है। सरकारी योजनाओं के फार्मभर कर अपने परिवार का गुजर-बसर करता है।
मई 2026 से कर्मचारी ने प्रति आवेदन फार्म सत्यापित करने के बदले 500 रुपये मांगने शुरू कर दिए हैं। 500 रुपये न देने की सूरत में आवेदन फार्म को रिजेक्ट कर दिया जाता है। मेरे कुछ आवेदन फार्म पेंडिंग हैं। कुछ को रिजेक्ट कर दिया गया है। सारे सबूत व दस्तावेज मेरे पास हैं। इसे आने वाली मुख्यमंत्री की ग्रीवेंस की बैठक में प्रस्तुत करूंगा।
यह है योजना
इस योजना के तहत रेहड़ी व पटरी वालों को 10 हजार रुपये का एक साल के लिए ऋण उपलब्ध करवाया जाता है। नियमित रूप से पैसा जमा करवाने पर यह राशि 20 हजार से 50 हजार रुपये तक हो जाती है। वर्ष 2020 में सरकार ने इस योजना को लागू किया था। तभी से स्ट्रीट वेंडर्स को नगर परिषद, पालिकाओं की ओर से कैंप लगाकर ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्रदेश में हजारों स्ट्रीट वेंडर्स इसका लाभ उठा चुके हैं।
ये दिए हैं डायरेक्टर ने आदेश
24 अगस्त 2026 को पत्र जारी करते हुए एडिशनल मिशन डायरेक्टर सुडा ने निर्देश दिए हैं कि 500 रुपये प्रति फार्म पैसा मांगने मामले में निष्पक्ष तौर पर जांच करते हुए एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए क्योंकि शिकायतकर्ता ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।