कोरोना महामारी में कई ऐसे परिवार हैं जिनके घर में एक के बाद एक मौत होती चली गई। कहीं पति, पत्नी ने कोरोना से दम तोड़ा तो कहीं मां बेटे ने। ऐसे में कोरोना महामारी ने इन परिवारों से अपनों को जुदां किया। वहीं विडंबना रही कि वे अपनों की प्रार्थना सभा में भी शामिल नहीं हो पाए। शहर के जय बर्फाना सेवा समिति के सेवादार बंटी अग्रवाल ने बताया कि कालांवाली में रहने वाले उनके जीजा प्रवीण कुमार की कोरोना से 28 अप्रैल को मौत हो गई जबकि इससे दो दिन पहले ही जीजा की माता की भी कोरोना से ही मौत हो गई थी। दोनों की अंतिम प्रार्थना सभा चार दिनों बाद ही एक साथ ही की गई। परिवार में अब बहन और दो बेटे हैं जो कि अभी तक इस सदमे से नहीं उभरे। 20 साल का बड़ा बेटा पढ़ाई कर रहा है लेकिन अब पूरे व्यापार को संभालने की जिम्मेदारी एकदम से उसके कंधों पर आ पड़ी।
गाजियाबाद में दूसरे जीजा और बहन की भी हुई मौत : बंटी अग्रवाल ने बताया कि इस महामारी से हमें अंदर तक इस हद तक तोड़ दिया कि अब कहीं बाहर निकलने को मन नहीं करता। जीजा प्रवीण की मौत के सदमे से नहीं उभरे थे कि गाजियाबाद में रहने वाले उनके दूसरे जीजा रमेश चौधरी की आठ मई और बहन रेखा चौधरी की नौ मई को भी कोरोना से मौत हो गई जबकि इससे कुछ दिन पहले जीजा के दामाद की कोरोना से मौत हो गई थी। पिछले दिन 21 मई को जीजा और बहन की प्रार्थना सभा और रस्म पगड़ी संपन्न हुई। लॉक डाउन लगने की वजह से वे उनकी प्रार्थना सभा में घर से ही जूम मीटिंग के माध्यम से शामिल हो पाए। इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि अपनों के गुजर जाने के बाद उनकी प्रार्थना सभा और रस्म पगड़ी में अब ऑन लाइन ही शामिल हो पा रहे हैं और अपनों को फोन पर ही दिलासा दे रहे हैं।