संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। घग्गर नदी का मुख्य तटबंध टूटने के बाद गांव पनिहारी, मुसाहिबवाला, बुर्जकर्मगढ़ और फरवाई कलां को काफी अधिक नुकसान पहुंचा था। मुसाहिबवाला और गांव पनिहारी के करीब 200 एकड़ में दो से तीन फुट रेत जमा हो गई। इसे हटाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से 31 अगस्त तक कमेटी का गठन किया जाना था, लेकिन अभी तक यहां पर कमेटी तक नहीं बन पाई है। प्रशासन से कोई उम्मीद न होने के कारण अब किसानों ने खुद के स्तर पर ही खेतों से रेत हटाना शुरू कर दिया है। किसान खेत में ही रेत के बड़े ढेर लगा रहे हैं।
जिले के गांव मुसाहिबवाला में सबसे पहले घग्गर नदी का बांध टूटा था। जिसके बाद इस क्षेत्र में संबंध अधिक रेत जमा हा गई। यहां के करीब 100 एकड़ में दो से तीन फुट तक रेत जमा हो गई। अन्य किसानों ने दोबारा से धान की रोपाई कर दी। जिन किसानों के खेतों में रेत जमा हुई वहां पर फसल की बोआई नहीं हो पाई। किसान प्रशासन से सहायता करने की आस लगा रहे थे, लेकिन अब सीजन निकलने के बाद किसानों ने प्रशासन से उम्मीद ही छोड़ दी है। आपस में ही भाईचारे के नाते ट्रैक्टर लगाकर खेतों से रेत हटाना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि अगर वह प्रशासन के सहारे रेत हटाने की आस पर बैठे रहे तो वह आने वाले सीजन में भी फसल की बिजाई नहीं कर पाएंगे। इससे उन्हें भूख मरने तक का सामना करना पड़ सकता है।
वहीं पनिहारी गांव के भी करीब 100 एकड़ में यही स्थिति बनी हुई है। नरेश कुमार, धर्मवीर, सतविंद्र सिंह, सीतेंद्र कुमार, हवा सिंह ने बताया कि खेत नदी के बिलकुल साथ है। इसके कारण यहां से पानी तेजी से गुजरा है। अगर वह रेत को नहीं हटाते तो उनकी जमीन बंजर हो जाएगी और प्रशासन के सहारे बैठे रहे तो क्या पता आने वाले सीजन में भी वह बिजाई कर पाए या न। कई बार उन्होंने अधिकारियों से गुहार लगाई है, लेकिन कोई भी सुनवाई नहीं हो पाई है।
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खेतों से रेत हटाने को लेकर कोई प्रशासन की ओर से कोई भी पत्र जारी नहीं किया गया है। इस तरह की कमेटी बनने को लेकर भी कोई जानकारी नहीं है।
सुरेश कुमार, जिला राजस्व अधिकारी , सिरसा।