भ्रष्टाचार के मामले में सरकारी अधिकारियों का रवैया आज भी जस का तस दिख रहा है। जागरूक लोगों द्वारा जब तथ्यों सहित जांच की मांग की जाती है तो आरोप है कि जांच करने वाले अधिकारी ही उस पर पर्दा डालने में जुट जाते हैं। ऐसा ही मामला गांव शेखुपुरियां में सामने आया है।
गांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता संदीप चाहर ने कागजों में पहले ही बनाई जा चुकी फिरनी के निर्माण को लेकर जांच की मांग की थी। जांच बड़ागुढ़ा के बीडीपीओ को सौंपी गई, लेकिन उन्होंने उस पर कुंडली ही जमा ली। ढाई माह बाद भी कार्रवाई न होने पर संदीप चाहर ने विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक से मामले की सीएम फ्लाइंग से जांच की मांग की है। गांव शेखुपुरियां में लगभग तीन वर्ष पूर्व फिरनी निर्माण का कार्य शुरू किया गया। इसके निर्माण पर लाखों की राशि खर्च दर्शा दी गई, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया। संदीप चाहर ने आरटीआई में फिरनी निर्माण की जानकारी मांगी। उन्हें जब सूचना नहीं दी गई तो उन्होंने प्रथम अपील दाखिल की, जिसके बाद हरकत हुई। कागजों में फिरनी 260 फुट लंबी व 27.5 फुट चौड़ी बनाई दर्शाई गई थी, लेकिन आरटीआई मांगने पर 150 फुट लंबी और साढ़े 27 फुट चौड़ी फिरनी बनाने का काम तीन साल बाद शुरू कर दिया गया। वर्तमान सरपंच ने भी यह माना कि फिरनी निर्माण का कार्य अब किया जा रहा है। इसके निर्माण के लिए न तो पंचायत विभाग से मंजूरी ली गई है और न ही कोई प्रस्ताव ही पारित किया गया है। फिरनी निर्माण किसकी देखरेख में किया जा रहा है, कौन कर रहा है, यह ज्ञात नहीं है।