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सिविल अस्पताल में हंगामा

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सिविल अस्पताल में शुक्रवार को हंगामा हो गया। एक मरीज ने अस्पताल से डिस्चार्ज के नाम पर चिकित्सक पर पैसे मांगने का आरोप जड़ दिया। हालात को भांपते हुए अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने मौके पर पुलिस को बुला लिया। गांव रिसालियाखेड़ा निवासी विक्रम 29 जून को अस्पताल में भर्ती हुआ था। अस्पताल के चिकित्सक सुखवंत सिंह ने एक जुलाई 2014 को एक्स-रे के लिए उसे सिरसा रेफर कर दिया। दो जुलाई को एक्स-रे करवाने के बाद वह पुन: अस्पताल की प्रथम मंजिल पर बेड नंबर 26 पर आ गया। शुक्रवार को उसके साथी जयवीर, मनफूल, दलीप कुमार बगैरा ने चिकित्सक सुखवंत सिंह पर आरोप जड़ते हुए हंगामा खड़ा कर दिया।
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एसएमओ ने अस्पताल के बिगड़ते माहौल को देखते हुए शहर थाना पुलिस को मौका पर बुलाया। जयवीर सिंह, मनफूल सिंह ने बताया कि झगड़े में घायल होने के बाद विक्रम को गोरीवाला के सामुदायिक केंद्र में ले जाया गया था। वहां से उसे डबवाली के लिए रेफर कर दिया गया। उसी दिन से उसका डबवाली के सरकारी अस्पताल में उपचार चल रहा है। वह उसे डिस्चार्ज कराने के लिए चिकित्सक सुखवंत सिंह के पास लगातार चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उन्होंने उसकी सुनवाई नहीं की। शुक्रवार को पुन: चिकित्सक के पास गए। चिकित्सक ने साफ कर दिया कि उनका मरीज अस्पताल में भर्ती ही नहीं है। वह उसे डिस्चार्ज नहीं कर सकता। डिस्चार्ज संबंधी फाइल बनाने के नाम पर उनसे 20 हजार रुपये मांगे। इसकी शिकायत उन्होंने एसएमओ एमके भादू से की।

एसएमओ ने भी उन्हें अपने कमरे से निकाल दिया। डॉ. सुखवंत सिंह ने बताया कि विक्रम तथा उसके साथियों ने उससे दुर्व्यवहार करते हुए कार्य में बाधा डाली। उस पर पैसे मांगने का आरोप लगाते हुए एक राजनेता का फोन करवाया। उससे गलत कार्य करवाने के लिए दबाव डाला गया। गलत कार्य न करने पर पैसे मांगने का आरोप लगाते हुए उसे बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। जोकि सरासर झूठा और तथ्यहीन है। डॉ. सुखवंत सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि लड़ाई-झगड़ों के मामले में 325/326 या 307 जैसी धाराएं जुड़वाने के लिए राजनेता उनके पास लगातार फोन करके दबाव बनाते हैं। ऐसे में एक चिकित्सक को प्रेशर में रहकर कार्य करना पड़ रहा है।
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उपरोक्त मामले में भी ऐसा ही हो रहा है। सिविल अस्पताल के एसएमओ एमके भादू ने बताया कि विक्रम तथा उसके साथी कई दफा उससे मिलकर गलत कार्य करने का दबाव बना रहे थे। शुक्रवार को वे चिकित्सक सुखवंत सिंह पर पैसे मांगने का आरोप जड़ते हुए उसके पास आए थे। गलत कार्य करने के लिए पुन: उन्होंने दबाव डालना शुरू कर दिया। जिसका उन्होंने विरोध किया। आरोपियों ने उन्हें देख लेने की धमकी देते हुए ट्रांसफर करवाने की धमकी दी।
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