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Sirsa News: छठ पर्व कल से, मेजर नहर पर सजने लगे घाट, नहाय-खाय से होगी शुरुआत

Mon, 04 Nov 2024 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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मेजर नहर पर छठ पूजा के लिए तैयारियां करते लोग।  संवाद 
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। दिल्ली पुल स्थित मेजर नहर पर छठ पूजा की तैयारियां पिछले एक सप्ताह से चल रही हैं। 5 नवंबर से छठ पूजा का पर्व नहाय-खाय से शुरू होगा। इसके लिए श्रद्धालुओं ने नहर के किनारे अपने-अपने घाटों की स्थापना करना शुरू कर दिया है। लोग नहर पर पहुंचकर पूजा करने के लिए अपने घाट बना रहे हैं।

जिले भर में छठ पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। भगवान सूर्य की उपासना कर छठ पूजा का त्योहार मनाया जाएगा। इसका आरंभ 5 नवंबर को नहाय-खाय से होगी, जिसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाएगा। 5 नवंबर को नहाय खाय, 6 नवंबर को खरना, 7 को संध्या अर्घ्य और 8 नवंबर को पारण आयोजित किया जाएगा। छठ पूजा के लिए दिल्ली पुल से लेकर बाजेकां फाटक तक श्रद्धालु अपने घाट बना रहे हैं। घाट की सफाई का काम भी निरंतर जारी है। समिति की ओर से श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए विशेष प्रबंध भी किए गए हैं।
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संकीर्तन के लिए लगाए जा रहे हैं टेंट
पूर्वांचल सेवा समिति की ओर से छठ पूजा कार्यक्रम को लेकर दिल्ली पुल नहर पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। नहर पर सफाई अभियान के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पूजा की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, नहर के आसपास भजन संकीर्तन के लिए टेंट भी लगाए जा रहे हैं, छठ पूजा को लेकर जय मां सरस्वती सेवा समिति के सदस्यों द्वारा नहर की सफाई और घाट निर्माण का कार्य किया जाएगा।


खरीदारी के लिए सजने लगे बाजार
छठ पूजा को लेकर बाजार सजने लगे हैं। बाजार में फल, पूजा सामग्री, गन्ना और अन्य सामान सजने लगे हैं। श्रद्धालुओं ने खरीदारी भी शुरू कर दी है। छठ पर्व पर श्रद्धालु विभिन्न प्रकार के फल अर्पित करते हैं। बाजारों में टोकरियां और पूजा सामग्री बिकने लगी हैं। वहीं गन्ना, अनानास सहित विभिन्न प्रकार के फलों की दुकानें लग रही हैं। छठ पूजा में गन्ने और अनानास का विशेष महत्व है।

पहला दिन : नहाय खाय
नहाय खाय के दिन व्रत करने वाली महिलाएं स्नान करके भोजन करती हैं। इस दिन महिलाएं भात, चना दाल और लौकी का भोजन करती हैं।
दूसरा दिन : खरना
इस दिन व्रतधारी खरना पूजन करती हैं। सबसे पहले उपासक स्नान करती हैं। इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर साठ के चावल, गुड़ और दूध की खीर बनाती हैं। भोग स्वरूप खीर को माता छठ को अर्पित किया जाता है। अंत में व्रती प्रसाद को ग्रहण करती हैं। इस दिन एक समय ही भोजन का विधान है। इसी दिन से 36 घंटे के लिए निर्जला व्रत शुरू होता है।
तीसरा दिन : संध्या अर्घ्य
इस दिन व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। संध्या अर्घ्य के दिन, व्रती महिलाएं पवित्र नदी या कुंड में डुबकी लगाती हैं। सूर्य और छठी मैय्या की पूजा की जाती है। सूर्यास्त के समय लोकगीत गाए जाते हैं। प्रसाद के रूप में पारंपरिक व्यंजन सूर्य देव को चढ़ाए जाते हैं। संध्या अर्घ्य के दिन, भक्त न कुछ खाते हैं और न ही जल पीते हैं।
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चौथे दिन : पारण
छठ पूजा के चौथे दिन यानी सप्तमी के दिन सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न होती है।
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वर्जन
छठ पूजा पर्व हमारा मुख्य पर्व है। शहरवासी मिलजुल कर धूमधाम से इस पर्व को मनाते है। 5 नवंबर को नहाय-खाय से छठ पूजा आरंभ होगी। 8 नवंबर को सुबह सूर्य अर्घ्य देकर महिलाएं व्रत का समापन करेंगी।
-मुन्ना गुप्ता, संस्थापक, जय मां सरस्वती सेवा समिति।
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