सुनील बैनीवाल
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय अपने फायर सिस्टम को अपग्रेड करने जा रहा है। विवि में नए बनने वाले भवनों में अपग्रेड फायर सिस्टम लगाया जा रहा है, जो सेंसर आधारित है। इससे आग लगने की छोटी से छोटी घटना को तुरंत रोका जा सकता है। इसके साथ ही विवि कैंपस में शुद्ध पेयजल सप्लाई को लेकर क्लोरिन सिस्टम को दुरुस्त करवाया जा रहा है।
विवि प्रशासन की ओर से आग लगने की घटनाओं को लेकर सभी भवनों में उपकरण लगाए गए हैं। इन सभी उपकरणों को एक्सपायर होने के बाद उन्हें दुरुस्त करवाया जाता है। इसी कड़ी में अब विवि प्रशासन की ओर से टेंडर लगाकर फायर सिस्टम लगाने का काम शुरू किया गया है।
एसटीपी के पानी से हरा भरा होता है विवि
विवि को हराभरा बनाने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लाट के पानी का इस्तेमाल बागवानी में किया जाता है। विवि की ओर से सभी पार्कों को हराभरा बनाने के लिए यही पानी इस्तेमाल में लाया जाता है। इस पानी को स्टोर करने के लिए एक टैंक बनाया गया है। यदि पानी की कमी रहती है, तो ट्यूबवेल का पानी मिलाकर बागवानी में इस्तेमाल होता है। विवि में एक एमएलडी क्षमता का एसटीपी लगाया हुआ है। इस पानी की टेस्टिंग को लेकर उपकरण विवि ने मंगवाए हैं, ताकि पानी की शुद्धता बनी रहे। विवि के अंदर करीब 10 पार्क बनाए गए हैं। हॉस्टल और अन्य भवनों में पार्क भी बने हुए हैं। इनमें इस पानी का इस्तेमाल होता है।
क्लोरिन सिस्टम को कर रहे है दुरूस्त
विवि में शुद्ध पेयजल सप्लाई को क्लोरिन सिस्टम को दुरुस्त करने का जा रहा है। क्लोरिन की मात्रा का निर्धारण मौसम के अनुसार किया जाता है। मौजूदा मौसम में क्लोरिन की मात्रा को कम या ज्यादा किया जाना जरूरी है। बिना क्लोरिन के प्रयोग किए पेयजल आपूर्ति सप्लाई करने से कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। इसलिए पानी में क्लोरिनेशन होना बेहद जरूरी है। ऐसे में क्लोरिन सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए टेंडर लगाया गया है।
महिला हॉस्टल से लेकर लैब के कामों के लगाए टेंडर
सीडीएलयू के महिला हॉस्टल तीन और यूएसआईसी लैब के कार्यों को लेकर भी टेंडर लगाए गए हैं। इससे उन्हें अपग्रेड किया जा सके और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधा मिल सके।
कोट्स
फायर सिस्टम दुरुस्त करवाने के साथ दो-तीन टेंडर ओर लगाए गए हैं। नियमित रूप से सुरक्षा उपकरणों को दुरुस्त करवाया जाता रहता है। वहीं नये भवनों में भी आधुनिक फायर सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त एसटीपी व डब्ल्यूटीपी के टेंडर भी लगाए है। - राकेश गोदारा, एक्सईएन, सीडीएलयू