सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर अब हरियाणा में पराली से बनने वाली बिजली उत्पादन, पराली की मात्रा और उसकी लागत का अध्ययन करते नजर आएंगे। विवि के प्रोफेसर डॉ. रोहताश पराली प्रबंधन के तहत बिजली का उत्पादन करने वाली यूनिट्स का ग्रांउड स्तर पर अध्ययन करेंगे। अध्ययन के बाद रिपोर्ट बनाकर हरियाणा बिजली रेगुलेटरी कमीशन को भेजेंगे। इस अध्ययन को लेकर हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन की तरफ से 11 लाख रुपये शोध प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। वहीं विवि के कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक व रजिस्ट्रार आरके बंसल ने शिक्षकों को बधाई दी।
बता दें कि अर्थशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर रूरल स्टडीज के निदेशक डॉ. रोहताश को प्रोजेक्ट मिला है। डॉ. रोहताश ने बताया कि विवि के यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर रूरल स्टडीज की ओर से हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन को फरवरी माह में प्रपोजल बनाकर भेजा गया था। जिसके बाद 10 जून को संबंधित विभाग की ओर से ईमेल के माध्यम से वर्क ऑर्डर प्राप्त हुआ है। इस वर्क ऑर्डर के साथ ही इस प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन के विभिन्न क्षेत्रों में पराली के महत्व, उसकी मांग और लागत का अध्ययन किया जाएगा।
डॉ. रोहताश ने कहा कि जहां पर पराली के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन होगा। वहीं किसानों को पराली के प्रबंधन और आय के स्रोतों में वृद्धि के बारे में जागरूक किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत पराली का उपयोग करके कम दामों पर बिजली का उत्पादन करने के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक पहलुओं पर शोध होगा। इसी अध्ययन के आधार पर निर्धारित समय में हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन को रिपोर्ट प्रस्तुत कि जाएगी। डॉ. रोहताश ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुरेन्द्र अहलावत प्रोजेक्ट डायरेक्टर होंगे।