नरमे की नमी जांच करते निजी व्यापारी।
- फोटो : Sirsa
कॉटन कार्पोरेशन ऑफ इंडिया ने अभी तक मंडी से नरमे की खरीद शुरू नहीं की है। मार्केट कमेटी द्वारा भेजे गए पत्र के जवाब में सीसीआई ने बीते दिनों खरीद न करने का कारण नरमे में नमी की मात्रा अधिक बताया। सरकारी बोली न होने के चलते किसानों को कम रेट पर अपनी फसल निजी आढ़तियों को बेचनी पड़ रही है। वहीं परमल धान की फसल बेचने के लिए किसानों का अब मौके पर ही रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।
बुधवार को सीसीआई द्वारा नरमे की खरीद न होने के कारण निजी आढ़तियों के द्वारा खरीद किया गया। जिसमें नरमे की अधिकतम बोली 5145 रुपये व न्यूनतम 4660 रुपये रही। नरमे में नमी की मात्रा अधिक होने के कारण व्यापारियों द्वारा रेटों में उतार चढ़ाव किया जा रहा है।
मार्केट कमेटी के पत्र का सीसीआई ने भेजा जवाब
सीसीआई द्वारा एक अक्टूबर से नरमे की सरकारी खरीद शुरू करनी थी। लेकिन सीसीआई ने बिना कोई कारण बताए खरीद शुरू नहीं की। इस पर जब किसानों ने मार्केट कमेटी से जवाब मांगने शुरू किए तो मार्केट कमेटी के सचिव विकास सेतिया ने सीसीआई को एक पत्र लिखा। जिसमें बोली न करने के बारे में सीसीआई से जवाब मांगा गया। बुधवार को मार्केट कमेटी के सचिव विकास सेतिया ने बताया कि उनका जवाब आ गया है। सीसीआई अधिकारियों का कहना है कि नरमे में अभी नमी की मात्रा अधिक आ रही है। जिस कारण वह खरीद शुरू नहीं कर रहे हैं। लेकिन कुछ दिन बाद जब नरमे में नमी की मात्रा कम होगी तब हम अपनी खरीद शुरू कर देंगे।
सीसीआई कर्मचारी प्रतिदिन करते हैं नमी की जांच
सीसीआई द्वारा एक अक्टूबर को नरमे की सरकारी खरीद शुरू करनी थी, लेकिन नौ अक्टूबर तक भी मंडी में नरमे की सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई। आढ़तियों का कहना है कि सीसीआई कर्मचारियों द्वारा मंडी में नरमे की ढेरियों के सैंपल जांच के लिए निकाले। जिसमें उन्होंने बताया कि नरमे में अभी भी नमी की मात्रा 14 से 16 प्रतिशत आ रही है।
निजी व्यापारियों के पास नमी जांच के नहीं हैं उपकरण
नरमे की खरीद कर रहे निजी व्यापारी नमी की जांच अपने हाथों से कर रहे हैं। व्यापारियों के द्वारा हाथों से नमी जांच कर अंदाजा ही लगाया जा रहा है। जिसके आधार पर किसान की फसल का मूल्य निर्धारित किया जा रहा है। वहीं जब सीसीआई की टीम नरमे में नमी की जांच करने आती है तो वह नमी जांच के उपकरणों का प्रयोग कर नमी की जांच करते हैं। जबकि व्यापारियों के पास ऐसा कोई उपकरण नहीं है जिससे वह नमी जांच कर सकें। इसका पूरा घाटा किसान को उठाना पड़ रहा है।