- तीन कर्मचारी हुए थे हमले में घायल, तीन बार टूटी गाड़ी, प्रशासन ने नहीं करवाई पुलिस व्यवस्था मुहैया
- दुधारू पशु बने हैं आफत, मंडियों में सस्ते खरीदकर छोड़ दे रहे खुला
फोटो 15,16
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर में पशु पकड़ो अभियान की टीम पर एक साल में सात बार हमला हो चुका हैं। तीन बार गाड़ी तोड़ी जा चुकी है। इसके बावजूद पुलिस व्यवस्था मुहैया करवाने से परिषद प्रशासन गुरेज कर रहा है। ऐसे में ठेकेदार ने अब पशु पकड़ने के टेंडर को आगे नियमित करने को लेकर असमर्थता जाहिर कर दी है।
जानकारी के अनुसार, कंगनपुर एरिया में ठेकेदार की टीम पर पांच दिन पहले हमला हुआ था। तीन लोग उसमें घायल हो गए थे। इस मामले में शहर थाना पुलिस ने शनिवार को विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ठेकेदार राजेश कोहली ने बताया कि नगर परिषद का 1500 पशु पकड़ने का लक्ष्य एजेंसी को दिया गया था, जो पूरा हो चुका है। इस घटना के बाद कोई पशु पकड़ो अभियान नहीं चलाया गया है। कर्मचारियों के साथ साथ वाहनों का नुकसान भी होता है लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। एक या दो दिन के अतिरिक्त कभी पुलिस मुहैया नहीं करवाई गई। बिना पुलिस सुरक्षा के पशु पकड़ना संभव नहीं है।
नहीं होंगे पशु कम, लगातार बढ़ रहे
नगर परिषद के दायरे में पशु कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। सिरसा के आसपास कालांवाली, ऐलनाबाद, डबवाली के साथ लगते पंजाब एरिया में हर सप्ताह पशु मेले लगते हैं। वहां से 15 से 20 हजार रुपये की कीमत के पशु डेयरी संचालक लेकर आते हैं। कुछ माह दूध निकालकर बेचने के बाद उन्हें खुला छोड़ देते हैं। जिन्हें छोटे पशुपालक पकड़ लेते हैं और उनका दूध निकालते हैं। इन पशुओं के एक से डेढ़ किलो दूध होता है। यदि यह पकड़े भी जाते हैं तो इसके मालिक को कोई फर्क नहीं पड़ता है। यही कारण है कि शहर में लगातार पशुओं की संख्या बढ़ रही है।
डेयरियों पर नहीं हुई ठोस कार्रवाई
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शहर में 150 के आसपास डेयरियां हैं। इन डेयरियों में 1 हजार के आसपास पशु हैं। आज तक इन डेयरियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एक मात्र डेयरी एक युवक द्वारा बार-बार शिकायत कर बंद करवाई गई थी जिसको लेकर जनपरिवाद समिति का सहारा उसे लेना पड़ा था। इसके अलावा, कई महीनों में दबाव आने पर नगर परिषद की टीम जागती है और नोटिस देती है लेकिन कोई ठोस कार्रवाई आज तक नहीं हुई है।
यह है मामला
पुलिस को दी शिकायत में जोगिंद्र सिंह ने बताया कि वह अपनी टीम के साथ कंगनपुर स्थित परशुराम कॉलोनी में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए गया था। इस दौरान पटेल चौक निवासी गोलू गुर्जर, विजय, मुकेश कुमार, गोशाला मोहल्ला निवासी सूरजी व अन्य लोगों ने उन्हें पशु पकड़ने से रोका। जब उन्होंने बताया कि नगर परिषद से अनुमति के बाद वे पशु पकड़ रहे हैं। उन लोगों ने उनकी बात पूरी सुनी ही नहीं और तलवार, लाठी-डंडों से हमला कर दिया। आसपास के लोगों ने बीच-बचाव किया तो वे लोग जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए। साथियों ने घायलों को नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया। वहीं, शहर थाना प्रभारी संदीप कुमार ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
यह है स्थिति
- दो साल में पशु पकड़े 3800
- मौजूदा समय में सड़कों पर - 2000 के आसपास
- गोशालाओं की व्यवस्था - जिले की सभी गोशालाओं में मांग के अनुरूप
कोट्स
एजेंसी की मांग के अनुरूप पुलिस सुरक्षा मुहैया करवाई जाती है। यह बात सही है कि ठेकेदार के कर्मचारियों पर हमला हुआ है। उनके वाहन को नुकसान पहुंचा है। टेंडर के अनुरूप पशु ठेकेदार ने पकड़ दिए हैं। इसको लेकर आगामी क्या प्रक्रिया अमल में लानी है। वह डीएमसी स्तर पर तय होगी। अभी फिलहाल अभियान बंद है।
-जयवीर सिंह, इंचार्ज, पशु पकड़ो अभियान
कोट्स
कई बार टीम पर हमले हो चुके हैं। पुलिस सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति होती है। रात को हमेशा टीम पर खतरा मंडराता रहता है। तीन बार गाड़ी टूट चुकी है। पशु भी 50 से 60 किलोमीटर दूर गोशालाओं में छोड़ने पड़ते हैं। हमारी प्रशासन से मांग है कि वे बड़ी गाड़ी उपलब्ध करवाए, तभी पशु पकड़ पाएंगे। इस प्रकार वाहनों और कर्मचारियों का नुकसान संभव नहीं है।
-राजेश कोटली, एजेंसी सुपरवाइजर, पशु पकड़ो टीम