संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। इस चुनाव में जिले की पांचों विधानसभा (विस) क्षेत्रों में कई समीकरण देखने के लिए मिले हैं। तीन विधायक और एक मंत्री के हारने के बाद इन नतीजों से माना जा रहा है कि हारने वाले किसी भी प्रत्याशी ने धरातल स्तर पर जनता से जुड़ने का प्रयास नहीं किया।
जिले की पांचों विस क्षेत्रों में नशाखोरी से परेशान जनता पेयजल, सीवरेज, नहरी पानी, कॉलेज में सुविधा बढ़ाने जैसी मांगों को पूरा कराने के लिए कभी धरना देती तो कभी सड़क पर जाम लगाती नजर आई। इसके बावजूद विधायकों ने इन समस्याओं का समाधान नहीं कराया। कालांवाली में जीतने वाले विधायक को भी भाजपा की नाराजगी और किसान आंदोलन का फायदा मिला। सरकार न होने के कारण जनता उनके किए गए कार्यों से कहीं न कहीं संतुष्ट नजर आई। ऐलनाबाद से इनेलो के प्रत्याशी अभय सिंह चौटाला चार बार विधायक रह चुके हैं। इस चुनाव में वह लोगों की नब्ज को नहीं समझ पाए। कॉलेज, नहरी पानी, सिंचाई के खाल आदि बनाने जैसे मुद्दे लोगों के जेहन में रहे और लोगों ने उन्हीं के आधार पर मतदान किया। शिक्षा के लिए ऐलनाबाद शहर समेत चोपटा क्षेत्र के विद्यार्थियों को सिरसा के सरकारी कॉलेज में आना पड़ता है।
वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी भरत सिंह बैनीवाल ने झोली फैलाकर लोगों से एक बार मौका देने की अपील कर सभी कार्यों को करवाने का आश्वासन दिया। कांग्रेस की लहर का फायदा भी बैनीवाल को मिला। ऐसे में अभय इस लहर को भांपने के बजाय अति आत्मविश्वास का शिकार हुए। सरकार बनाने के दावे करने के चक्कर में वह अपने ऐलनाबाद क्षेत्र को साधने में ही चूक गए।
बिकाऊ वोट का मुद्दा बना, हार का कारण
सिरसा में विधायक गोपाल कांडा और कांग्रेस प्रत्याशी गोकुल सेतिया के बीच कड़ा मुकाबला देखने के लिए मिला। गोकुल मौके पर जाकर लोगों को जोड़ने में जुटे रहे और युवा होने के नाते उन्होंने युवा वर्ग को साधने का प्रयास किया। चुनाव में शहर की जनता को बिकाऊ बताने का मुद्दा बड़ा उछला। इसे पूरी तरह से काउंटर करने में हलोपा प्रत्याशी गोपाल कांडा मात खा गए। गरीब और मध्यम वर्ग ने इस मुद्दे पर ही मतदान किया। वहीं, शहर में करवाए गए हलोपा प्रत्याशी के विकास कार्य हमेशा विवादों में रहे हैं। विकास कार्यों से भी लोग संतुष्ट नहीं आए। धर्म के मामले में कई बार विवाद होना भी लोगों के गले नहीं उतरा। ऐसे कई मुद्दे उनकी हार का कारण बने।
दिग्विजय की मजबूती ने तोड़ा अमित सिहाग का गढ़
डबवाली में त्रिकोणीय मुकाबला रहा। इनेलो प्रत्याशी आदित्य देवीलाल अपने निजी और इनेलो के वोट बैंक को पूरी तरह से साधने में कामयाब रहे। उन्हें भावात्मक रूप से लोगों का समर्थन मिला। कांग्रेसी प्रत्याशी और निवर्तमान विधायक अमित सिहाग के वोट बैंक में बड़े स्तर पर सेंधमारी हुई। वह अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों और सरकार बदलने के दावे करते नजर आए जबकि जजपा प्रत्याशी दिग्विजय चौटाला उनके गढ़ में लोगों के बीच जाते रहे। गांवों में रात गुजारकर उन्होंने बड़े स्तर पर वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित किया। इसे कांग्रेस प्रत्याशी नहीं भांप सके। डबवाली में नशे के कारण कई युवाओं की मौत होती रही और विधायक अपने कार्यकाल में इस पर भी प्रभावी रोक नहीं लगा सके।
कांग्रेस की एकजुटता बनी रणजीत सिंह की हार का कारण
रानियां में निर्दलीय प्रत्याशी और पूर्व बिजली मंत्री चौधरी रणजीत सिंह पहले दिन से खुद को मजबूत कहते हुए नजर आए। दावे करते रहे कि वह जहां से गुजरते हैं हवा का रुख बदल जाता है। उन्होंने इसके भरसक प्रयास किए। अपने विकास कार्य गिनवाए और गांवों में जाकर लोगों से मिले। रानियां की जनता कहीं न कहीं उनके भाजपा में शामिल होने और लोकसभा चुनाव लड़ने को भूल नहीं पाई। भाजपा विरोधी लहर का उन्हें भी सामना करना पड़ा। वहीं, कांग्रेस की आपसी फूट का लाभ उन्हें होगा और नए चेहरे को कमजोर समझने की गलती उनसे हो गई। कांग्रेस ने आखिरी वक्त में एकजुटता दिखाई और कंबोज बिरादरी ने भी कांग्रेस प्रत्याशी का साथ दिया। ऐसे में कांग्रेस के वोट बैंक से जीत की आस लगाए बैठे चौधरी रणजीत सिंह को हार का सामना करना पड़ा। जजपा का सहयोग भी इनेलो का वोट बैंक नहीं तोड़ सका।