सिरसा। सोमवार की सर्द रात और घनी धुंध का लाभ उठाते हुए चोरों ने शहर के बेगू रोड स्थित ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में सेंध लगा दी। चोरों की प्लानिंग तो बड़ी वारदात को अंजाम देने की थी लेकिन स्ट्रांग रूम तीसरा ताला तोड़ने में कामयाबी हासिल नहीं हो पाई। चोर यहां से पुराने कटे-फटे पांच के नोट और चिल्लर चुराकर ले गए। बैंक की दीवार को कटर से काटकर चोर अंदर दाखिल हुए थे। सारी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। मंगलवार सुबह बैंक का चपरासी ड्यूटी पर आया तो अंदर सारा सामान व दीवार टूटी देखकर सन्न रह गया। उसने बैंक मैनेजर को घटना की सूचना दी। इसके बाद पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।
शहर के बेगू रोड पर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की ब्रांच है। सीसीटीवी कैमरे में कैद वारदात के अनुसार सोमवार रात को सर्दी ज्यादा थी और दस बजे के बाद घनी धुंध पड़ रही थी। इसका फायदा उठाते हुए चोर बैंक मेें सेंध लगाने के लिए पहुंचे। उन्होंने कटर की सहायता से बैंक की दीवार चोरस टुकड़े में काट दी। इस बड़े छेद में आराम से चोर बैंक के अंदर घुस आए। उन्होंने बैंक की इलेक्ट्रॉनिक वायरिंग काट डाली। वे स्ट्रॉग रूम समक्ष पहुंचे और दो ताले तोड़ दिए। तीसरा ताला काफी प्रयास के बावजूद वे तोड़ नहीं पाए। इसके बाद चोरों गल्ले और अलमारी में खंगाली। यहां चोरों को पांच रुपये के कटे-फटे नोटों की गड्डी और ढेर सारे चिल्लर मिले। उन्होंने ये सब चुराया और चलते बने। चोर अगर स्ट्रॉग रूम का तीसरा ताला तोड़ने में कामयाब हो जाते तो वारदात बड़ी हो सकती थी। स्ट्रॉग रूम में आठ से दस लाख रुपये की नगदी थी। सुबह बैंक का चपरासी प्रेम कुमार ड्यूटी पर आया तो अंदर सारा सामान बिखरा हुआ और दीवार कटी हुई मिली। उसने तुरंत इसकी सूचना मैनेजर राजेंद्र कुमार को दी। मैनेजर ने पुलिस को घटना के बारे में बताया। बैंक व पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे।
खुफिया कैमरे में कैद हुए चेहरे
चोरों ने बैंक में घुसते ही सारे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए लेकिन जब वे दीवार काटकर अंदर घुसे तो खुफिया कैमरे में ये उनके चेहरे कैद हो गए। ये चेहरे ज्यादा साफ नहीं हैं। वारदात को तीन से चार चारों ने अंजाम दिया है। इलेक्ट्रॉनिक वायरिंग काटने से सायरन भी नहीं बज पाया। इस वारदात ने एक बार फिर से पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। पुलिस अधिकारियों की मानें तो सुरक्षा व्यवस्था पर मौसम की मार पड़ रही है। रात को धूंध काफी घनी होती है, हाथ को हाथ दिखाई नहीं देता। ऐसे में गश्त करना बिलकुल भी संभव नहीं होता।