सिरसा। जिले में ब्लैक फंगस के अब तक 64 मरीज मिल चुके हैं, जिनमें से 11 की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से खानापूर्ति करते हुए नागरिक अस्पताल में ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए 10 बेड लगा वार्ड बनाया गया है। वार्ड में पहुंचने वाले मरीज की एंडोस्कोपी कर जांच की जाती है अगर मरीज ब्लैक फंगस से ग्रस्त पाया जाता है उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जा रहा है। अस्पताल में सर्जरी और दवाइयों के लिए कोई बंदोबस्त नहीं हैं।
नागरिक अस्पताल में उपचार की व्यवस्था न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर से रुख करना पड़ रहा है। सर्जरी और उपचार का खर्च भी तीन से चार लाख रुपये है। कई मरीज निजी अस्पतालों में ठीक नहीं हो पा रहे तो मरीजों के परिजन उन्हें दूसरे जिलों में इलाज के लिए लेकर पहुंच रहे हैं। जिले में मिले मरीजों में 50 सिरसा के जबकि 14 दूसरे जिलों के संक्रमित शामिल हैं। अस्पताल में सिर्फ सैंपल लिया जाता है, इलाज नहीं होता।
अस्पताल में ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए वार्ड बनाया गया है। वार्ड में मरीजों के लिए 10 बेड लगाए हैं। अस्पताल में पहुंचने वाली दवाइयां और इंजेक्शन भी मरीजों तक पहुंचाए जा रहे हैं। - डॉ. मनीष बांसल, सीएमओ, सिरसा
इलाज के बाद फिर से मुंह में फैला ब्लैक फंगस
सिरसा के सवेरा होटल वाली गली निवासी भारत ने बताया कि उसके भाई का ब्लैक फंगस होने के बाद सिरसा के एक निजी अस्पताल में करीब 10 दिनों तक इलाज करवाया। मरीज के स्वस्थ होने के बाद अस्पताल ने उसे छुट्टी दे दी। दो दिन बाद मरीज के दांत खराब होने लग गए। जब उन्होंने डॉक्टर से जांच करवाई तो डॉक्टर ने ब्लैक फंगस दांतों में फैलने की बात कही और सर्जरी करने का विकल्प बताया। इसके पश्चात वह मरीज को अग्रोहा मेडिकल अस्पताल में लेकर पहुंचे। जब उन्होंने डॉक्टरों को दवाइयों व इंजेक्शनों की लिस्ट दिखाई तो डॉक्टरों ने इस्तेमाल की गई दवाइयों और इंजेक्शन कारगार न होने की जानकारी दी। वहीं उन्होंने बताया कि निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्हें दो से ढाई लाख का खर्च भी उठाना पड़ा और अब दोबारा से अग्रोहा मेडिकल में उपचार करवाना पड़ रहा है।
चंडीगढ़ से मंगवाई जा रही हैं दवाइयां
सिरसा के गदली निवासी ब्लैक फंगस के मरीज के परिजन प्रदीप कुमार ने बताया कि अब उन्हें सिरसा से दवाइयां नहीं मिल रही है। मरीज के लिए उन्होंने चंडीगढ़ से दवाइयां मंगवाई हैं। इलाज के दौरान उनका करीब चार लाख का खर्च आ चुका है और अभी तक डॉक्टर की ओर से दवाइयां जारी रखने की जानकारी दी गई है। सिरसा के मेडिकल स्टोरों पर दवाइयां नहीं मिल रही है। कर्ज उठाकर उन्होंने मरीज का इलाज करवाया है। जबकि सरकार की ओर से भी उन्हें कोई सहायता नहीं मिल पा रही है।