शहर के घूम रहे बेसहारा पशुओं को नंदीशाला में रख रखाव के लिए कुछ दिनों पहले नगर परिषद ने दूसरी बार संस्थाओं से आवेदन मांगे थे, लेकिन बठिंडा की एक ही संस्था ने आवेदन किया। उसने एक हजार पशुओं पर मासिक खर्च 25 से 30 लाख रुपये व अन्य जरूरत के सामान की सूची बनाकर भेज दी। लेकिन भारी भरकम आर्थिक सहायता की मांग को लेकर नगर परिषद ने असमर्थता जताई है। ऐसे में दूसरी बार सिरसा की केलनियां नंदीशाला के रख रखाव का मामला अटक सकता है। हालांकि नप ने 24 फरवरी तक नंदीशाला को संभालने की इच्छुक संस्थाओं को दस्तावेज के साथ उपस्थित होने के लिए कहा है।
इससे पहले भी नवंबर माह में नगर परिषद ने केलनियां नंदीशाला के लिए आवेदन मांगे थे। लेकिन केवल फतेहाबाद की एक ही संस्था ने आवेदन किया था और उसने ढाई से तीन लाख रुपये प्रति माह आर्थिक सहायता की मांग की थी। बतां दे कि शहर में एक हजार से ज्यादा बेसहारा पशु घूमते हैं। पूरे हरियाणा में पिछले सवा साल में सबसे अधिक 10772 पशुओं की मौत सिरसा में हुई है। जिले में करीब 117 गोशाला और नंदीशाला है वहीं सिरसा को केटल फ्री करने की सीएम घोषणा है।
सिरसा में करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से नंदीशाला का निर्माण किया गया था। ताकि इस नंदीशाला में शहर के स्टे केटल को रखा जा सकें और सिरसा को बेसहारा पशुओं से मुक्त किया जा सकें। लेकिन नंदीशाला को चलाने के लिए सिरसा नगर परिषद ने दो बार आवेदन मांगे। नवंबर में पहली बार फतेहाबाद की एक ही संस्था ने आवेदन किया तो उसने पशुओं की संख्या के आधार पर दो से ढाई लाख रुपये प्रति माह आर्थिक सहायता की मांग की। नप ने दूसरी बार फरवरी में आवेदन मांगा जिसमें बठिंडा की एक संस्था ने आवेदन किया था। उसने एक लंबी चौड़ी लिस्ट बनाकर नगर परिषद को सौंप दी। जिसमें कि बेसहारा पशुओं को संभालने के लिए लाखों रुपये की आर्थिक सहायता की जरूरत है। हालांकि नप ने भी करीब 18 शर्त तय की हुई। जिसके अनुसार नगर परिषद सिर्फ बिजली व पानी का खर्च ही अदा करेगी।
एक हजार पुश के रख रखाव का खर्च करीब 25 से 30 लाख
बठिंडा की संस्थान ने एक हजार पशु पर कम से कम एक ट्रैक्टर ट्राली की मांग की। एक हजार पशुओं पर प्रतिमाह चारा और लेबर का खर्च 25 से 30 लाख रुपये बताया। हाई स्पीड टोका, एक कराहा, डोलू लिफ्टर, जनरेटर, पानी का टैंक, बीमार पशुओं को उठाने की मशीन, जीवों के लिए गैलरी, कोतवाल का ठेका, रूडी का स्थान, डॉक्टर सर्जन, रेहड़ी, दान पात्र, गल्ले, कस्सी फावड़ा, धर्मकांटा की मांग की है।
स्थानीय शहरी निकाय विभाग और गो सेवा आयोग ने भी मांगा रिकॉर्ड
शहरी निकाय विभाग ने सिरसा नगर परिषद से स्टे कैटल के लिए उठाए गए बंदोबस्त की जानकारी मांगी है। साथ ही शहर में पकड़े जाने वाले पशुओं को रखने के प्रबंधों की जानकारी मांगी है। यह जानकारी 26 फरवरी तक मुख्यालय में भेजनी है। वहीं हरियाणा गो सेवा आयोग ने जिला गोवंश विकास अधिकारी एवं उपनिदेशक पशुपालन विभाग से वर्ष 2019,20 में स्टे केटल रिपोर्ट मांगी है। जिसमें जिले में स्टे केटल की कुल संख्या का ब्योरा मांगा है। हालांकि गो सेवा आयोग ने जिले की सभी नगर परिषद व जिला विकास पंचातय अधिकारी व खंड अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। लेकिन अभी तक जिला गो वंश विकास अधिकारी को किसी भी विभाग ने रिपोर्ट नहीं भेजी। इस संबंध में उन्हें रिमाइंडर भी भेजा गया है। जिला गो विकास अधिकारी सुखविंद्र चौहान ने बताया कि हमने जानकारी मांगी है। लेकिन अभी जानकारी नहीं आई। सरकार ने सिंतबर 2019 तक पशुओं की गणना करवाई थी। लेकिन उसका डाटा अभी तक जारी नहीं किया गया।
संस्था ने सूची सौंपी है। लेकिन इस संबंध में उपायुक्त से मार्गदर्शन मांगा जाएगा।
-गुरशरण सिंह, सचिव, नगर परिषद सिरसा।
हमारा लक्षय शहर को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने का है। एक हजार पशुओं पर आने वाले खर्च का ब्योरा दिया है। अभी कमेटी से बातचीत जारी है।
-नरेश सोनी, संस्था अध्यक्ष।