संवाद न्यूज एजेंसी
चोपटा। जिंदगी में दूसरों की सेवा करने का जज्बा अगर किसी के भीतर हो, तो मृत्यु के बाद भी वह किसी की जिंदगी में उजाला भर सकता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया सिरसा जिले के गांव बरासरी निवासी 72 वर्षीय बलवंत बैनीवाल ने, जिनका हाल ही में निधन हो गया। लेकिन उनकी आंखों से अब दो लोगों को रोशनी मिलेगी, और उनके जीवन में एक नई सुबह आएगी।
बलवंत बैनीवाल ने मरणोपरांत नेत्रदान की इच्छा वर्षों पहले ही जाहिर कर दी थी और बाकायदा रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया था। निधन से महज दो दिन पहले, उन्होंने अपने परिवारजनों को फिर से याद दिलाया कि उनकी आंखें जरूर दान की जाएं। उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए पुत्र अमीलाल और भतीजे सुशील बैनीवाल ने नेत्रदान के लिए नजदीकी डेरा सच्चा सौदा हॉस्पिटल, सिरसा से संपर्क किया। अस्पताल से आई टीम ने समय रहते बलवंत जी के नेत्रों को सुरक्षित संचित कर लिया, जिससे अब दो जरूरतमंदों को रोशनी मिल सकेगी। परिजनों के इस कदम ने पूरे गांव में मानवता और सेवा का संदेश फैलाया। बलवंत बैनीवाल के अंतिम संस्कार के समय सैंकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में यह प्रेरणादायक कार्य किया गया, जिसकी हर किसी ने सराहना की।
भतीजे नंबरदार सुशील बैनीवाल ने बताया कि बलवंत बैनीवाल ने न सिर्फ अपने जीवन में सादगी और सेवा को महत्व दिया, बल्कि मृत्यु के बाद भी समाज के लिए कुछ करके दिखाया। उनका यह कदम हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम भी सिर्फ एक नेत्रदान से किसी के जीवन का अंधकार दूर कर सकते हैं। पुत्र अमीलाल ने बताया कि उनके पिता ने मरणोपरांत आंखें दान करने का फैसला काफी पहले ले लिया था। इस बार चार-पांच दिन पहले बीमार होने के बाद उन्होंने परिजनों को अवगत करवा दिया था कि उन्होंने आंखें दान की हुई है। और मरने के बाद उनकी आंखें दान की जाए।